More Then 10 Lakh Teachers Post Vacant In Govt Schools Of India, Bihar And Up On Top - देश में...


दशकों बाद देश में नई शिक्षा नीति आई है। केंद्र सरकार के प्रयासों से उसे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जोर-शोर से तैयारियां भी की जा रही हैं। यहां तक कि कई राज्यों में इसे लेकर समितियां भी बनाई गईं हैं। लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब सरकारी स्कूल बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाएंगे। जब वहां पर्याप्त शिक्षा-संसाधन और सुविधाएं हों, लेकिन पर्याप्त शिक्षा-संसाधन और सुविधाओं की तो बात छोड़ ही दीजिए, देश के सरकारी विद्यालयों में तो पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता ही नहीं है।

देशभर में शिक्षकों के 61 लाख 84 हजार 464 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 10 लाख 60 हजार 139 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। पूरे देश में शिक्षकों का सबसे ज्यादा टोटा तो बिहार और यूपी में हैं। इनके बाद झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है। चिंतन योग्य बात है कि जब स्कूल में शिक्षा देने वाले पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे तो फिर शिक्षा नीति कैसे अमल में आ पाएगी? नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के तहत की गई भारतीय शिक्षा प्रणाली के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की कल्पना कैसे साकार हो पाएगी?  

हाल ही में संसद के पटल पर एक प्रश्न के जवाब में प्रस्तुत किए गए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के एकीकृत आंकड़े पर नजर डालें तो पाते हैं कि पूरे देश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के 10 लाख 60 हजार 139 पद खाली पड़े हैं। ये आंकड़ा स्वयं केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने लोकसभा में बताया था। उन्होंने बताया कि पूरे देश में 2020-21 तक शिक्षकों के 61 लाख 84 हजार 464 पद स्वीकृत हैं। इनमें से फिलहाल, करीब 10 लाख 60 हजार 139 पद रिक्त हैं। 





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