RBI Foundation Day 2020: आरबीआई स्थापना दिवस: जान लीजिए,...

M Salahuddin | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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वर्ष 1926 में इंडियन करंसी एंड फाइनैंस से संबंधित रॉयल कमिशन ने भारत के लिए एक सेंट्रल बैंक बनाने का सुझाव दिया। उस कमिशन को हिल्टन यंग कमिशन के नाम से भी जाना जाता था। अलग सेंट्रल बैंक की स्थापना का उद्देश्य करंसी और क्रेडिट के कंट्रोल के लिए एक अलग संस्था बनाना और सरकार को इस काम से मुक्त करना था। साथ ही देश भर में बैंकिंग सुविधा मुहैया कराना भी मकसद था। वर्ष 1934 के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट के तहत रिजर्व बैंक की स्थापना हुई और 1935 में इसने अपना कामकाज शुरू किया। उसके बाद से जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र का स्वरूप बदलता रहा, वैसे-वैसे रिजर्व बैंक की भूमिकाओं और कामकाज में बदलाव होता रहा।

सेंट्रल बैंक की जरूरत क्यों पड़ी?

सेंट्रल बैंक की स्थापना के कई कारण थे। हालांकि उस समय रुपया आम करंसी थी लेकिन कई रुपये के कई अलग-अलग सिक्के चलन में थे जिनकी अलग-अलग वैल्यू होती थी। अथॉरिटीज ने एक स्टैंडर्ड सिक्का मार्केट में लाने की कोशिश की। कई सालों तक मुर्शिदाबाद का सिक्का सैद्धांतिक रूप से मानक सिक्का रहा जो सिक्कों के लिए रेट्स ऑफ एक्सचेंज का आधार था। मुगलों के समय से एक मानक सिक्के का चलन रहा। उस सिक्के के वजन से अन्य सिक्कों का वजन अगर कम होता तो उस पर एक चार्ज वसूला जाता था जिसको अंग्रेजी में डिस्काउंट और हिंदी में बट्टा कहा जाता था। अभी भी अगर आप फटे-पुराने नोट बदलवाने जाते हैं तो कुछ पैसे आपके काटते हैं जिसको बट्टा ही बोलते हैं। उस समय के सिक्कों की स्थिति अभी की दुनिया भर में डॉलर और अन्य करंसी की स्थिति से समझ सकते हैं। अभी तो पूरे भारत में एक ही मुद्रा यानी रुपया चलन में है जिसकी हर जगह एक वैल्यू है। लेकिन दुनिया भर में अलग-अलग करंसी है जिसकी वैल्यू डॉलर के मुकाबले तय होती है। उसी तरह भारत में भी अलग-अलग सिक्कों का चलना था जिसका मूल्य अलग होता था। ऐसे में एक ऐसी संस्था की जरूरत महसूस हुई जो देश भर में कोई एक मानक सिक्का को चलवाए।

टाइमलाइन

1926: इंडियन करंसी एंड फाइनैंस से संबंधित रॉयल कमिशन ने भारत के लिए एक सेंट्रल बैंक की स्थापना का सुझाव दिया।

1927: लेजिस्लेटिव असेंबली में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया गया। लेकिन विभिन्न वर्गों के बीच सहमति की कमी थी जिस कारण उस विधेयक को वापस ले लिया गया।

1933: भारतीय संवैधानिक सुधारों पर एक श्वेत पत्र लाया गया जिसमें रिजर्व बैंक की स्थापना का सुझाव दिया गया। लेजिस्लेटिव असेंबली में एक नया विधेयक पेश किया गया।

1934: विधेयक पारित हो गया और गवर्नर जनरल की मंजूरी मिल गई।

1935: रिजर्व बैंक इंडिया ने 1 अप्रैल से भारत के सेंट्रल बैंक के तौर पर अपना कामकाज शुरू किया। शुरू में इसका सेंट्रल ऑफिस कोलकाता था जिसे बाद में मुंबई शिफ्ट किया गया। पांच करोड़ रुपये पेड अप कैपिटल (paid up capital) के साथ प्राइवेट शेयरहोल्डर्स के बैंक के रूप में इसकी शुरुआत हुई। स्टॉक के बदलने में शेयरधारकों से प्राप्त होने वाले पैसों को पेड अप कैपिटल कहा जाता है।

1942: इससे पहले तक रिजर्व बैंक बर्मा (म्यांमार) के लिए भी करंसी जारी करता था लेकिन इसके बाद यह सेवा बंद कर दी।

1947: बर्मा की सरकार के बैंकर के तौर पर रिजर्व बैंक ने काम करना बंद किया। .

1948: आजादी के बाद कुछ सालों तक रिजर्व बैंक पाकिस्तान को भी सेंट्रल बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराता था जिसे 1948 में बंद किया गया।

1949: भारत सरकार ने रिजर्व बैंक (ट्रांसफर ऑफ पब्लिक ओनरशिप) एक्ट, 1948 के तहत रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किया।



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