black death the deadliest catastrophe of the world history
(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/6ब्लैक डेथ: पढ़िए करोड़ों की जान लेने वाली त्रासदी की पूरी कहानी

13वीं सदी के मध्य में यूरोप में बड़ी तबाही मची। यह तबाही प्लेग के रूप में आई जिसने करोड़ों लोगों की जानें ले लीं। आइए इतिहास की इस भयावह त्रासदी के बारे में सबकुछ जानते हैं...
2/6बीमारी कैसे फैली?

बीमारी फैलने को लेकर कई थिअरी दी जाती है। एक में तो यह माना जाता है कि जानवरों से बीमारी फैली। वहीं दूसरी थिअरी में यह माना जाता है कि बीमारी इंसान से ही इंसान के बीच फैली। बीमारी पहले चीन, मिस्र और ईरान से होते हुए पश्चिम के देशों में फैली। प्लेग का बैक्टीरिया संक्रमित इंसान के अहम अंगों को भारी नुकसान पहुंचा देता था। (फोटो: साभार GettyImages)
3/6क्या थे लक्षण?

संक्रमित लोगों को फोड़े पड़ जाते थे जिससे खून और मवाद निकलता रहता था। इसके अलावा बुखार, उल्टी, दस्त और भयानक दर्द इसके लक्षण थे। लोगों को खून की खांसी भी होती थी। बीमार आदमी की 5 से 7 दिनों में मौत हो जाती थी। (फोटो: साभार GettyImages)
4/6ऐसे यूरोप पहुंची तबाही

यह जानलेवा प्लेग की बीमारी अक्टूबर 1347 में यूरोप पहुंची थी। काले सागर से आकर 12 जहाज सिसली के बंदरगाह मेसिना पर रुके थे। बंदरगाह के डॉक पर जमा लोग उस समय स्तब्ध रह गए जब जहाज के ज्यादातर नाविक को मरा हुआ पाया। जो जिंदा बचे थे, वे बुरी तरह से बीमार थे। उनके बदन में काले फोड़े पड़ गए थे जिनसे खून और मवाद निकल रहे थे। सिसली के प्रशासन ने तुरंत जहाज को बंदरगाह से निकालने का आदेश दिया। लेकिन तब तक काफी देरी हो चुकी थी। बीमारी फैल चुकी थी जिसने अगले पांच साल में यूरोप में 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया। उस समय पूरे यूरोप की जितनी आबादी थी, उसके करीब एक-तिहाई लोगों की मौत हो गई। (फोटो: साभार GettyImages)
5/6उपचार कैसे किया गया?

बीमारी को लेकर लोगों में एक अजीब तरह का खौफ फैल गया। बीमारी का सटीक कारण नहीं मालूम होने की वजह से कुछ लोग अंधविश्वास का भी सहारा ले रहे थे। उस समय उपचार के अधिक साधन भी उपलब्ध नहीं थे। अंत में तो लोग अपनी-अपनी जान बचाने में लग गए। डॉक्टरों ने मरीजों को देखना छोड़ दिया। धर्मगुरुओं ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। कुछ लोग शहरों को छोड़कर वीराने में भाग गए लेकिन वहां भी बीमारी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। (फोटो: साभार GettyImages)
6/6भगवान ने दी थी सजा?

जब किसी चीज का इंसान को कारण समझ में नहीं आता है तो वह अटकलें लगाना शुरू कर देता है। यही ब्लैक डेथ के साथ भी हुआ। उस समय बीमारी का सटीक कारण तो पता नहीं था। ऐसे में लोगों ने उसे भगवान का कहर बताया। लोगों का मानना था कि समाज में व्याप्त बुराइयों जैसे लालच, ईशनिंदा, व्यभिचार और दुनिया के प्रति अति मोह की वजह से बीमारी फैली है। उनका यह भी मानना था कि समाज के अंदर कुछ लोग ऐसे मौजूद हैं जिनकी वजह से यह समस्या पैदा हुई है और अगर उनको समाज से निकाल दिया जाए या उनकी बलि दे दी जाए तो समस्या दूर हो जाएगी। इसका नतीजा यह हुआ कि 1348 और 1349 में हजारों यहूदी लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। यहूदियों के अलावा समाज के अन्य लोगों को भी इस अंधविश्वास का शिकार होना पड़ा। कुछ लोग खुद को कोड़ा मारते थे ताकि भगवान से क्षमा मिल सके। लोग समूहों में भी खुद को कोड़े मारते थे। यह सब भगवान से क्षमा मांगने के नाम पर हो रहा था। (फोटो: साभार GettyImages)

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