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2/8यह है पूरा नाम

के. सिवन का पूरा नाम डॉ. कैलासावडिवू सिवन पिल्लई है। उनका जन्म 14 अप्रैल 1957 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के सरक्कलविलई गांव में हुआ था। 2018 में उन्हें इसरो के चेयरमैन के रूप में अपॉइंट किया गया था। उन्होंने ए एस किरण कुमार का स्थान लिया था।
3/8यहां से की पढ़ाई

सिवन ने 1980 में मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से एयरोनॉटिकल इंजिनियरिंग में ग्रैजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने 1982 में बेंगलुरु के आईआईएससी से एयरोस्पेस इंजिनियरिंग में पोस्टग्रैजुएशन किया। आईआईटी बॉम्बे से उन्होंने वर्ष 2006 में एयरोस्पेस इंजिनियरिंग में पीएचडी पूरी की।
4/8परिवार के पहले ग्रैजुएट

सिवन अपने परिवार में ग्रैजुएट होने वाले पहले शख्स थे। उनके भाई और दो बहनें गरीबी की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। सिवन के मुताबिक, जब वह कॉलेज में थे तो अपने पिता की खेती में मदद करते थे। इसी वजह से उन्हें ऐसे कॉलेज में ऐडमिशन दिलाया गया जो उनके घर के पास था। जब उन्होंने बीएससी (मैथ्स) को 100 प्रतिशत नंबरों से पास किया तब जाकर उन्होंने अपना विचार बदला।
5/8जूते और सैंडल पहनने तक का था अभाव

सिवन की मानें तो बचपन में उनके पास न जूते थे न सैंडल, वह नंगे पैर ही रहते थे। उन्होंने कॉलेज तक धोती पहनी और पहली बार पैंट तब पहना जब एमआईटी में दाखिला लिया। उनके अंकल के मुताबिक, सिवन काफी हार्ड वर्किंग थे और वह कभी किसी ट्यूशन या कोचिंग क्लासेस में नहीं गए।
6/81982 में इसरो से जुड़े

सिवन वर्ष 1982 में इसरो में आए और PSLV परियोजना पर उन्होंने काम किया। उन्होंने ऐंड टु ऐंड मिशन प्लानिंग, मिशन डिजाइन, मिशन इंटिग्रेशन ऐंड ऐनालिसिस में काफी योगदान दिया। वह इंडियन नैशनल ऐकेडमी ऑफ इंजिनियरिंग, एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया में फेलो हैं। कई जर्नल में सिवन के पेपर पब्लिश हो चुके हैं।
7/8इसलिए कहा जाता है रॉकेट मैन

क्रायोजेनिक्स इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और आरएलवी प्रोग्राम में सिवन के योगदान की वजह से उन्हें इसरो का 'रॉकेट मैन' भी कहा जाता है।इससे अलग वह खाली वक्त में बागवानी करना पसंद करते हैं।
8/8कई पुरस्कारों से किया गया सम्मानित

सिवन को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इसमें वर्ष 1999 में मिला श्री हरी ओम आश्रम प्रेरित डॉ विक्रम साराभाई रिसर्च अवॉर्ड, 2007 में मिला इसरो मेरिट अवॉर्ड, चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी से अप्रैल 2014 में मिली डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि शामिल है।


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