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करगिल विजय दिवस: ये हैं पाकिस्तान को धूल चटाने वाले परमवीर

करगिल विजय दिवस: ये हैं पाकिस्तान को धूल चटाने वाले परमवीर

भारत के लिए 26 जुलाई बेहद गौरव का दिन है। 20 साल पहले आज ही के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तानी फौज को धूल चटाकर करगिल युद्ध में विजय प्राप्त की थी। भारत में इस युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है और इस जीत के लिए हमारे देश के कई बेटे शहीद हुए थे। वैसे तो इस युद्ध में हिस्सा लेने वाला हर जवान हमारे लिए हीरो है। यहां जानते हैं इस युद्ध के कुछ वीरों के बारे में जिन्होंने युद्ध में पाकिस्तान के हौसले पस्त कर दिए...

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विक्रम बत्रा

विक्रम बत्रा

भारतीय सेना के इतिहास में सबसे कठिन माने जाने वाले ऑपरेशन को लीड करते हुए कैप्टन विक्रम बत्रा शहीद हो गए और उनकी वीरता के लिए मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। पाकिस्तानी सेना में उनका इतना खौफ था कि आपस में संदेश भेजने के लिए उनकी फौज उन्हें 'शेरशाह' कहकर बुलाती थी। कैप्टन ने कहा था, 'या तो मैं तिरंगा लहराकर आउंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर, लेकिन आऊंगा जरूर।'

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योगेंद्र यादव

योगेंद्र यादव

करगिल युद्ध में वीरता के साथ दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए योगेंद्र यादव को सर्वोच्च सैन्य सम्मान 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार लेते वक्त उनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी। वह परमवीर चक्र पाने वाले सबसे युवा सैनिक हैं।







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संजय कुमार

संजय कुमार

संजय कुमार को भी इस युद्ध में वीरता दिखाने के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। करगिल युद्ध में गोली लगने की वजह से उनके शरीर से खून बह रहा था फिर भी वह पाकिस्तानी फौजी की मशीनगन उठाकर दुश्मन के बंकर में घुस गए। यहां हाथ से लड़कर ही उन्होंने 3 दुश्मन मार गिराए।

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मनोज कुमार पांडेय

मनोज कुमार पांडेय

कैप्टन मनोज कुमार पांडेय गोरखा रायफल्स में थे और गोरखा रायफल्स अपनी वीरता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। करगिल युद्ध के वक्त उनकी उम्र सिर्फ 24 साल थी और दुश्मनों से मुकाबला करते वक्त शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

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विजयंत थापर

विजयंत थापर

कैप्टन विजयंत थापर करगिल युद्ध में लड़ते हुए 29 जून 1999 को शहीद हो गए थे। करगिल युद्ध में उनकी वीरता को देखते हुए मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। कैप्टन विजयंत वीर होने के साथ एक नेक दिल इंसान भी थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक कश्मीरी बच्ची रुखसाना के पिता को आतंकियों ने मार दिया था जिसके बाद से वह बच्ची गुमसुम रहने लगी। कैप्टन विजयंत ने उस बच्ची का दाखिला स्कूल में करवा दिया था। करगिल युद्ध के दौरान जब उन्हें खतरे का अहसास हुआ तो शहादत से पहले वह अपने मां-बाप को चिट्ठी लिखकर गए कि रुखसाना की पढ़ाई न रुकने दें और आर्थिक मदद करते रहें।

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अनुज नायर

अनुज नायर

कैप्टन अनुज नायर करगिल युद्ध में लड़ते वक्त 7 जुलाई 1999 को शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह भारतीय सेना का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है।




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