Life Story Of Bankim Chandra, Who Is Bankim Chandra Chattopadhyay? Who Wrote Vande Mataram And When? Who Is...


भारत की आजादी एक बहुत लंबे स्वाधीनता आंदोलन की देन है। इसमें तत्कालीन राजनेताओं व राजा-महाराजाओं का ही नहीं बल्कि साहित्यकारों, कवियों, वकीलों और विद्यार्थियों का भी विशेष योगदान था। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की आजादी की लड़ाई में सक्रिय रहे साहित्य मनीषियों ने वंदे मातरम जैसी अपनी महान और अमर रचनाओं से न केवल आजादी की लड़ाई में नई जान फूंकी बल्कि भारतीय भाषाओं के साहित्य को मजबूती देते हुए नए आयाम प्रदान किए। ऐसे ही एक स्वतंत्रता सेनानी के द्वारा 1874 में लिखा गया एक अमर गीत वंदे मातरम न केवल भारतीय स्वाधीनता संग्राम का मुख्य उद्घोष बना बल्कि आज देश का राष्ट्रगीत भी है।

अमर गीत वंदे मातरम को लिखकर महान साहित्य रचनाकार और स्वतंत्रता सेनानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय उर्फ बंकिम चंद्र चटर्जी सदैव के लिए अमर हो गए। वंदे मातरम सिर्फ एक गीत या नारा ही नहीं, बल्कि आजादी की एक संपूर्ण संघर्ष गाथा है, जो 1874 से लगातार आज भी करोड़ों युवा दिलों में धड़क रही है। निस्संदेह स्कूल में पढ़ने के दौरान वंदे मातरम तो सबने सुना होगा, लेकिन वंदे मातरम के पीछे की कहानी और इसके रचियता बंकिम चंद्र के जीवन के उस संघर्ष को बहुत ही कम लोग जानते होंगे। तो आइए जानते हैं कौन थे बंकिम चंद्र और कैसे मिला हमें वंदे मातरम...  





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