Study Of Mental Waves Can Determine The Efficiency Of Employees Iit Madras - मानसिक...



अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Updated Wed, 02 Sep 2020 06:36 AM IST





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देश में होने वाली औद्योगिकी इकाइयों की दुर्घटनाओं को कर्मचारियों के मानसिक तरंगों का अध्ययन करके कम किया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने इकाइयों में काम करने वाले व्यक्तियों की मानसिक स्थिति का अध्ययन करके उन्हें संवेदनशीलता के हिसाब से काम सौंपने की वकालत की है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने अपने नए अध्ययन में इसका खुलासा करते हुए कहा कि इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) की मदद से कर्मचारियों के दिमाग की विद्युत तरंगों को मापा जा सकता है। इसके अनुसार औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत व्यक्तियों की मानसिक तंरगों का अध्ययन करके उनके दुर्घटना से निपटने की तत्परता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे कर्मचारियों की किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में मानसिक सक्रियता का पता चल सकता है।

अधिकांश औद्योगिक दुर्घटनाओं में मानवीय चूक जिम्मेदार
अधिकांश औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच में मानव भूल सबसे बड़ी वजह के रूप में सामने आती है। शोधकर्ता के अनुसार अध्ययन में सामने आया है कि मानव मस्तिष्क तरंगों के विश्लेषण की यह पद्धति औद्योगिक दुर्घटनाएं रोकने में प्रभावी भूमिका निभा सकती है। आईआईटी मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर राजगोपालन श्रीनिवासन ने इस अध्ययन का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि औद्योगिक दुर्घटनाओं में 70 फीसदी मामलों में मानवीय चूक जिम्मेदार होती है।

प्रोफेसर श्रीनिवासन की योजना ईईजी तरंगों से संबंधित अध्ययन को अधिक जोखिम वाले उद्योगों में मानवीय क्षमता में सुधार से जोड़ने की है। इस प्रकार कर्मचारियों की मानसिक स्थिति के सटीक आकलन से औद्योगिक सुरक्षा को एक नया आयाम मिल सकता है। इस अध्ययन को इंडिया साइंस वायर ने जारी किया और इसके निष्कर्ष कंप्यूटर्स एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।



देश में होने वाली औद्योगिकी इकाइयों की दुर्घटनाओं को कर्मचारियों के मानसिक तरंगों का अध्ययन करके कम किया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने इकाइयों में काम करने वाले व्यक्तियों की मानसिक स्थिति का अध्ययन करके उन्हें संवेदनशीलता के हिसाब से काम सौंपने की वकालत की है।




भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने अपने नए अध्ययन में इसका खुलासा करते हुए कहा कि इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) की मदद से कर्मचारियों के दिमाग की विद्युत तरंगों को मापा जा सकता है। इसके अनुसार औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत व्यक्तियों की मानसिक तंरगों का अध्ययन करके उनके दुर्घटना से निपटने की तत्परता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे कर्मचारियों की किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में मानसिक सक्रियता का पता चल सकता है।

अधिकांश औद्योगिक दुर्घटनाओं में मानवीय चूक जिम्मेदार



अधिकांश औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच में मानव भूल सबसे बड़ी वजह के रूप में सामने आती है। शोधकर्ता के अनुसार अध्ययन में सामने आया है कि मानव मस्तिष्क तरंगों के विश्लेषण की यह पद्धति औद्योगिक दुर्घटनाएं रोकने में प्रभावी भूमिका निभा सकती है। आईआईटी मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर राजगोपालन श्रीनिवासन ने इस अध्ययन का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि औद्योगिक दुर्घटनाओं में 70 फीसदी मामलों में मानवीय चूक जिम्मेदार होती है।

प्रोफेसर श्रीनिवासन की योजना ईईजी तरंगों से संबंधित अध्ययन को अधिक जोखिम वाले उद्योगों में मानवीय क्षमता में सुधार से जोड़ने की है। इस प्रकार कर्मचारियों की मानसिक स्थिति के सटीक आकलन से औद्योगिक सुरक्षा को एक नया आयाम मिल सकता है। इस अध्ययन को इंडिया साइंस वायर ने जारी किया और इसके निष्कर्ष कंप्यूटर्स एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।





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