8 मई को हर साल विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया जाता है। मुख्य रूप से रेडक्रॉस सशस्त्र हिंसा और युद्ध में पीड़ित लोगों एवं युद्धबंदियों के लिए काम करती है।
Edited By M Salahuddin | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
एक भयावह युद्ध से आया रेड क्रॉस का आइडिया
स्विटजरलैंड के एक उद्यमी थे जॉन हेनरी डिनैंट। 1859 में वह फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय की तलाश में गए थे। उन दिनों अल्जीरिया पर फ्रांस का कब्जा था। डिनैंट को उम्मीद थी कि अल्जीरिया में व्यापारिक प्रतिष्ठान खोलने में नेपोलियन उनकी मदद करेंगे। लेकिन डिनैंट को सम्राट नेपोलियन से मिलने का मौका नहीं मिला। इसीबीच वह इटली गए जहां उन्होंने सोल्फेरिनो का युद्ध देखा। एक ही दिन में उस युद्ध में 40,000 से ज्यादा सैनिक मारे गए और घायल हुए। किसी भी सेना के पास घायल सैनिकों की देखभाल के लिए चिकित्सा कोर नहीं थी। डिनैंट ने स्वंयसेवकों के एक समूह को संगठित किया। उनलोगों ने घायलों तक खाना और पानी पहुंचाया। घायलों का उपचार किया और उनके परिवार के लोगों को पत्र लिखा। इस घटना के 3 साल बाद डिनैंट ने अपने इस दुखद अनुभव को एक किताब के रूप में प्रकाशित किया। किताब का नाम था 'अ मेमरी ऑफ सोल्फेरिनो'। उन्होंने युद्ध के भयावह दृश्य के बारे में पुस्तक में लिखा था। उन्होंने बताया कि कैसे युद्ध में अपने अंगों को गंवाने वाले लोग कराह रहे थे। उनको मरने के लिए छोड़ दिया गया था। पुस्तक के अंत में उन्होंने एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय सोसायटी की स्थापना का सुझाव दिया था। ऐसी सोसायटी जो युद्ध में घायल लोगों का इलाज कर सके। ऐसी सोसायटी जो हर नागरिकता के लोगों के लिए काम करे। उनके इस सुझाव पर अगले ही साल अमल किया गया।
रेड क्रॉस की स्थापना
फरवरी, 1863 में जिनीवा पब्लिक वेल्फेयर सोसायटी ने एक कमिटी का गठन किया। उस कमिटी में स्विटजरलैंड के पांच नागरिक शामिल थे। कमिटी को हेनरी डिनैंट के सुझावों पर गौर करना था। कमिटी के पांच सदस्यों का नाम इस तरह से है, जनरल ग्यूमे हेनरी दुफूर, गुस्तावे मोयनियर, लुई ऐपिया, थिओडोर मॉनोइर और हेनरी डिनैंट खुद। ग्यूमे हेनरी दुफूर स्विटजरलैंड की सेना के जनरल थे। एक साल के लिए वह कमिटी के अध्यक्ष रहे और बाद में मानद अध्यक्ष। गुस्तावे युवा वकील थे और पब्लिक वेल्फेयर सोसायटी के अध्यक्ष थे। उसके बाद से उन्होंने अपने जीवन को रेड क्रॉस कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। लुई और थिओडोर चिकित्सक थे।
अक्टूबर 1863 में कमिटी की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में 16 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की जिसमें कई उपयुक्त प्रस्तावों और सिद्धांतों को अपनाया गया। इसी सम्मेलन में कमिटी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक चिह्न का भी चयन किया गया। उस मौके पर दुनिया के सभी राष्ट्रों से ऐसे स्वैच्छिक संगठनों की स्थापना की अपील की गई जो युद्ध के समय बीमार और जख्मी लोगों की देखभाल करे। इन यूनिटों को नैशनल रेड क्रॉस सोसायटीज के नाम से जाना गया। बाकी पांच सदस्यों वाली कमिटी को शुरू में International Committee for Relief to the Wounded के नाम से जाना गया। बाद में इसका नाम इंटरनैशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस हो गया। गुस्तावे इसके पहले अध्यक्ष बने।
क्या काम करता है?
यह संगठन सशस्त्र हिंसा और युद्ध में पीड़ित लोगों एवं युद्धबंदियों के लिए काम करती है। यह उन कानूनों को प्रोत्साहित करती है जिससे युद्ध पीड़ितों की सुरक्षा होती है। इसका मुख्यालय जिनीवा स्विटजरलैंड में है। आईसीआरसी को दुनिया भर की सरकारों के अलावा नैशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसायटीज की ओर से फंडिंग मिलती है।
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