Edited By Ratna Priya | पीटीआई | Updated:
यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता के अनुसार, लॉकडाउन (Lockdown) के कारण एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य एक जगह नहीं मिल सकते थे, इसलिए वोटिंग की प्रक्रिया ई-मेल के जरिए पूरी करवाई गई। सदस्यों ने इस बात पर वोटिंग की कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम बदला जाना चाहिए या नहीं।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल में 15 सदस्य हैं। सभी से उनका पक्ष पूछा गया। इनमें से 3 का जवाब नहीं आया। जबकि अन्य 12 सदस्यों ने एक ही जवाब दिया - नहीं, यूनिवर्सिटी का नाम नहीं बदला जाना चाहिए। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी का नाम बदले जाने के खिलाफ एक रिजॉल्यूशन पास कर दिया गया।
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इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने के बाद से ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर प्रयागराज विश्वविद्यालय (Prayagraj University) किए जाने की बात चल रही थी। लेकिन कई छात्र संगठन भी इसका विरोध कर रहे थे।
विरोध करने वालों का कहना था कि इलाहाबादा विश्वविद्यालय करीब 130 साल पुराना विवि है। इसका अपना स्वर्णिम इतिहास है, जो इसके नाम से ही जाना जाता है। ये नाम एक धरोहर है जिससे छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

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