coronavirus an act of god: एक्ट ऑफ गॉड है कोरोनावायरस?...

बिजनस और लीगल टर्म में अकसर एक्ट ऑफ गॉड (act of god) वाक्यांश का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक्ट ऑफ गॉड क्या है, किस परिस्थिति को एक्ट ऑफ गॉड कहा जाता है, आज इसके बारे में सबकुछ जानेंगे...

M Salahuddin | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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दुनिया में घटनाओं का सिलसिला जारी रहता है। उनमें से कुछ घटनाओं पर इंसान काबू पा लेता है तो कुछ में स्थिति नियंत्रण के बाहर हो जाती है। आमतौर पर प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूनामी और भूकंप इंसान के बस से बाहर होते हैं। इस तरह की आपदाओं या घटनाओं को एक्ट ऑफ गॉड कहा जाता है। इसे फोर्स मैज्योर (Force Majeure) के नाम से भी जानते हैं। अभी जिस तरह से कोरोनावायरस संक्रमण की स्थिति है, वह भी एक्ट ऑफ गॉड कही जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इसका टीका अब तक नहीं खोजा जा सका है। जो भी इलाज हो रहा है, वह एक अनुमान के मुताबिक यानी कोई सटीक इलाज नहीं खोजा जा सका है। ऐसे में यह स्थिति इंसान के बस के बाहर हो रही है।

कानून की नजर में

एक्ट ऑफ गॉड की स्थिति में इंसान को कुछ जिम्मेदारी, कर्तव्य और काम से छुटकारा मिल जाता है। कानून की नजर में भी एक्ट ऑफ गॉड वह स्थिति है जो इंसान के बस से बाहर हो। इसको एक उदाहरण से समझ सकते हैं। कोई व्यक्ति किसी से किसी खास दिन मौजूद रहने और कुछ खास जिम्मेदारी निभाने का वादा करता है। लेकिन उस दिन तेज आंधी-तूफान आ जाता है जिस वजह से परिवहन का कोई साधन उपलब्ध नहीं होता है। ऐसे में वह अपने वादे को पूरा नहीं कर सकता है। चूंकि आंधी का आना और रोकना इंसान के बस से बाहर की बात है, इसलिए उसको एक्ट ऑफ गॉड माना जाएगा। इस स्थिति में वह इंसान वादा पूरा नहीं करने का दोषी नहीं कहा जा सकता है। भले ही उस काम को अंजाम देने के लिए कोई और समय तय किया जाए या रिफंड की व्यवस्था की जाए। अगर किसी प्रकार का दोनों के बीच करार हुआ है तो कानूनी तौर पर उस इंसान को काम नहीं होने के लिए जिम्मेदार बिल्कुल नहीं ठहराया जा सकता है।



दूसरा उदाहरण

एक कंपनी है जो सामानों की सप्लाई करती है। लेकिन हिमस्खलन की वजह से सारे रास्ते बंद हो गए जिससे वह क्लायंट को समय पर सप्लाई नहीं दे सकी। इस स्थिति में क्लायंट नुकसान की भरपाई के लिए मुकदमा नहीं कर सकता है।

2015 की घटना

2015 में पश्चिमी अफ्रीका के देशों में इबोला फैल गया था। मोरक्को को दो साल पर आयोजित होने वाले फुटबॉल टूर्नामेंट की उस साल मेजबानी करनी थी। लेकिन मोरक्को की सरकार ने एक्ट ऑफ गॉड या फोर्स मैज्योर का हवाला देते हुए टूर्नामेंट रद्द कर दिया। लेकिन कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट ने मोरक्को के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि इबोला फोर्स मैज्योर की श्रेणी में नहीं आता है क्योंकि उस खतरनाक वायरस ने मेजबानी को असंभव नहीं बनाया था। मोरक्को को टूर्नामेंट रद्द करने का दोषी ठहराया गया और 1 मिलियन डॉलर जुर्माना लगाया गया। अगर इबोला को फोर्स मैज्योर मान लिया जाता तो मोरक्को को अपनी जिम्मेदारी से बचने का दोषी नहीं माना जाता।

Web Title what is act of god and all you need to know about natural disasters(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)

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