Tulip Mania: घर से भी ज्यादा महंगा एक फूल, पढ़ें...

नीदरलैंड जिसे अगर ट्युलिप का देश भी कहा जाए तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। यहां आपको ट्युलिप की सैकड़ों वरायटी मिलेगी जो इस देश को काफी खूबसूरत बनाती हैं। ट्युलिप के इस देश की एक रोचक कहानी है जो ट्युलिप मैनिया के नाम से जानी जाती है। आज उसके बारे में ही बताएंगे...

M Salahuddin | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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नीदरलैंड का एक इलाका है जिसे हॉलैंड के नाम से जाना जाता है। कुछ लोग हॉलैंड को अलग देश ही समझ लेते हैं। खैर यह बात अलग है। हॉलैंड से जुड़ी है ट्युलिप मैनिया या ट्युलिप को लेकर पागलपन की हद तक आकर्षण की कहानी। 17वीं सदी की बात है। जैसे मौजूदा दौर में बिटकॉइन की खरीदारी को लेकर क्रेज पाया जाता है, उसी तरह का क्रेज 17वीं सदी में ट्युलिप को लेकर हॉलैंड में पाया जाने लगा था। जिसको देखो सबकुछ बेचकर भी ट्युलिप बल्ब खरीदना चाहता था। इस सबके पीछे एक उम्मीद या लालच जो कह लीजिए, वह था। इसका नतीजा हुआ कि ट्युलिप का एक बल्ब लोगों की औसत सैलरी से छह गुना ज्यादा बिकने लगा। लेकिन अचानक फिर कीमत में ऐसी गिरावट आई कि बड़ी तादाद में लोग दिवालिया हो गए।
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तुर्की से आया

ट्यूलिप हॉलैंड में तुर्की से आया था। ऑटोमन साम्राज्य में उसकी खेती होती थी। तुर्की में ट्युलिप खूबसूरती और हैसियत का प्रतीक था और आज भी वहां खूबसूरती का प्रतीक है। 15वीं सदी में हॉलैंड ने तुर्की से ट्युलिप का आयात करना शुरू किया। थोड़े ही समय में ट्युलिप हॉलैंड के अंदर लोकप्रिय हो गया। हॉलैंड में ट्युलिप एक इंसान की हैसियत और रुतबा का प्रतीक बन गया। अगर किसी आदमी के पास ट्युलिप का कुछ संग्रह नहीं पाया जाता तो उसे बदकिस्मत समझा जाता था। ट्युलिप पैसे वालों घरानों के बागीचों की शान बन गया। पैसे वालों की देखा-देखी डच सोसायटी का मर्चैंट मिडल क्लास भी ट्युलिप की ओर आकर्षित हुआ। शुरू में तो यह स्टेटस सिंबल था क्योंकि काफी महंगा होता था। साथ ही इसकी खेती काफी आसान थी। इस वजह से भी यह लोकप्रिय हो गया। 17वीं सदी की शुरुआत में पेशेवर कृषकों ने ट्युलिप उगाने की तकनीक में काफी सुधार किया। वे स्थानीय स्तर पर ही फूल का उत्पादन करने लगे और ट्युलिप का व्यापार फलने-फूलने लगा। इससे ट्युलिप के दामों में बढ़ोतरी हुई। आज के समय में भी हॉलैंड में ट्युलिप का कारोबार खूब फल-फूल रहा है।
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और ट्युलिप ने लोगों को पागल कर दिया

1633 से पहले तक ट्युलिप के व्यापार में पेशेवर और एक्सपर्ट् लोग ही थी। लेकिन धीरे-धीरे इसकी बढ़ती कीमत के बाद 1634 में पूरे हॉलैंड में ट्युलिप को लेकर पागलपन पैदा हो गया। हर कोई सबकुछ छोड़कर ट्युलिप का व्यापार ही करने की सोचने लगा। मिड्ल क्लास से लेकर गरीब वर्ग तक को ट्युलिप में सुनहरा भविष्य नजर आने लगा। लोगों ने अपने खेत, मकान और दुकान या तो गिरवी रखकर या बेचकर ट्युलिप खरीद लिए। ट्युलिप बल्ब या उसकी एक पंखुड़ी की कीमत उस समय एक मकान की कीमत से ज्यादा थी। 1636 तक ट्युलिप व्यापार इतना बढ़ गया कि ऐम्सटर्डम के स्टॉक एक्सचेंज, रॉटर्डैम, हारलेम और अन्य डच शहरों में उसकी नियमित रूप से मंडी लगने लगी। लोगों को उम्मीद थी कि वसंत का मौसम आने पर इसके दाम ज्यादा मिलेंगे और वे मालामाल हो जाएंगे।

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जब अरमानों पर फिर गया पानी

ट्युलिप का यह क्रेज वर्ष 1637 तक ठंडा पड़ गया। शुरू में खरीदारों ने वादा किया था कि वे ऊंचे दामों पर ट्युलिप खरीद लेंगे लेकिन बाद में वे मुकर गए। इससे ट्युलिप की कीमत धड़ाम जमीन पर गिर गई। बड़ी संख्या में लोग दिवालिया हो गए। यह ट्युलिप मैनिया व्यापारिक इतिहास की इतनी चर्चित घटना बन गई कि आज भी इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार ऐसा होता है कि लोगों को लगता है कि किसी खास ऐसेट्स में निवेश करने से बाद में काफी अच्छा रिटर्न मिलेगा। फिर लोग धड़ाधड़ उसमें निवेश करने लगते हैं। इससे उस ऐसेट्स की कीमत काफी ऊंचे लेवल पर पहुंच जाती है। काफी हाई लेवल पर पहुंचने के बाद कीमत में गिरावट का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस स्थिति को व्यापारिक शब्दावली में ट्युलिप मैनिया कहा जाता है और इस तरह के ऐसेट्स को ट्युलिप कहा जाता है।

Web Title what was the tulipmania dutch tulip bulb market bubble know all about(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)

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