World Soil Day: World Soil Day: शासक जिसने मिट्टी का मोल...

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

फोटो: Facebook@His Majesty King Bhumibol Adulyadejफोटो: Facebook@His Majesty King Bhumibol Adulyadej
5 दिसंबर को पूरी दुनिया में वर्ल्ज सॉइल डे यानी विश्व मिट्टी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद सभी लोगों को मिट्टी की महत्ता के प्रति जागरुक करना है ताकि वे इसके कटाव या क्षरण को रोक सकें। पर क्या आप जानते हैं कि आखिर 5 दिसंबर को ही विश्व मिट्टी दिवस के रूप में क्यों और किसकी याद में मनाया जाता है? साथ ही हम आपको दुनिया के एकमात्र ऐसे शख्स के बारे में भी बताएंगे जिसने मिट्टी के मोल को खुद तो समझा ही साथ ही दूसरों को भी उसके मोल को समझाया और कई किसानों की समस्याएं दूर कीं।



भूमिबोल अदुल्यादेज-असंभव को संभव बनाने वाला शासक


दरअसल 5 दिसंबर को थाइलैंड के राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (Bhumibol Adulyadej) का जन्मदिन होता है और उन्हीं के जन्म दिवस को विश्व मिट्टी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भूमिबोल ने 70 सालों तक थाइलैंड पर राज किया और इस दौरान वह अपने क्षेत्र के हर गरीब से लेकर हर किसान तक से मिलते थे और उनकी समस्याओं को सुलझाते थे। उनकी जिंदगी को सुझारने और खेती को नए आयाम देने के लिए भूमिबोल अदुल्यादेज ने 4 हजार प्रॉजेक्ट्स की शुरुआत की। इन सभी योजनाओं का मुख्य केंद्र मिट्टी ही थी।

मिट्टी को बचाने के लिए वेटिवर ग्रास का प्रयोग

उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए वेटिवर ग्रास (Vetivar grass) का इस्तेमाल शुरू किया, जिसके लिए उन्हें इंटरनैशनल इरोज़न कंट्रोल असोसिएशन की तरफ से इंटरनैशनल मैरिट अवॉर्ड से नवाजा गया। यह एक ऐसी घास है जो मिट्टी के कटाव और क्षरण को रोकने में प्रभावकारी है। यही नहीं, ऐसिडिक सॉइल को ट्रीट करने के लिए भूमिबोल ने Klaeng Din Project की शुरुआत भी की।
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फोटो: Facebook@His Majesty King Bhumibol Adulyadej



मिले ये अवॉर्ड

अगर भूमिबोल को थाईलैंड के 'किसानों का मसीहा' कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उन्होंने कई गावों की यात्राएं कीं और किसानों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को सुना व निदान खोजा। उन्होंने ऐसी-ऐसी कठिन समस्याओं का निदान किया, जो असंभव लगती थीं। उनके इसी अभूतपूर्व योगदान के चलते उन्हें 2012 में इंटरनैशनल यूनियन ऑफ सॉइल सांइस की तरफ से पहले Humanitarian Soil Scientist का अवॉर्ड मिला। 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने भूमिबोल के जन्म दिवस को विश्व मिट्टी दिवस के रूप में घोषित कर दिया।

थाइलैंड के किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या थी मिट्टी की और भूमिबोल के सामने यह समस्या तब और अधिक खुलकर सामने आई जब वह 1983 में पेच्चाबुरी (Petchaburi) प्रांत में हुआसाई समुदाय गए। वहां उन्होंने एक पुराना वन रिजर्व देखा, जिसकी जमीन सूखी और बंजर थी। उस जगह को देख उन्होंने तभी कह दिया था कि यह जगह जल्द ही रेगिस्तान बन जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी देखा कि कुछ किसान लालच के चक्कर में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बस यहीं से भूमिबोल अपने कार्य में जुट गए। उन्होंने मिट्टी की समस्या पर 'Sufficiency Economy Philosphy' नाम की किताब भी लिखी, जो मार्केट आते ही छा गई और लोगों को मिट्टी के मोल को समझने व उसके बचाव को रोकने के लिए प्रेरित किया।



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