khudiram birth anniversary must read two interesting stories about him
(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/5Khudiram Bose: ...जब जेलर ने खुदीराम को दिए आम, रोचक कहानी

देश के लिए मात्र 18 साल की उम्र में फांसी के फंदों पर झूलने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर, 1889 को हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश मैजिस्ट्रेट डगलस किंग्सफर्ड को मारने का प्रयास किया था लेकिन गलती से किसी और को मार बैठे थे। इस आरोप में उनको फांसी की सजा हुई थी। उनकी जिंदगी के 2 किस्से बहुत रोचक हैं, आइए आज उनके बारे में जानते हैं...
2/5आम लेकर आया जेलर

11 अगस्त, 1908 को सुबह छह बजे खुदीराम बोस को फांसी दी जानी थी। 10 अगस्त की रात को उनके पास जेलर आया। जेलर को खुदीराम से बेटे की तरह प्यार और लगाव हो गया था। जेलर अपने साथ चार रसीले आम लाया था जिसे खुदीराम को खाने के लिए दिए। खुदीराम ने जेलर से आम लेकर रख लिए।
3/5...जब सुबह में आया जेलर

अगली सुबह जेलर खुदीराम को लेने आए ताकि उनको फांसी दी जा सके। जेलर ने देखा कि उसने रात में खुदीराम को जो आम दिए थे, वे वैसे ही पड़े थे। जेलर के पूछने पर खुदीराम ने कहा कि जिसको सुबह फांसी के फंदे पर झूलना हो, उसे खाना-पीना कैसे अच्छा लगेगा। जेलर यह सुनकर आम उठाने को आगे बढ़ता है। वह जैसे ही आम को उठाना चाहता है, तो छिलके पिचक जाते हैं। दरअसल खुदीराम ने आम खा लिया था और छिलके को फुलाकर ऐसे रख दिया था जिससे लगे कि आम हो। इस पर खुदीराम जोर से ठहाका मारकर हंसे और उनके साथ जेलर एवं अन्य लोग भी हंसने लगे।
4/5जेलर रह गया दंग

जेलर खुदीराम को बिंदास देखकर हैरान रह गया। वह सोच रहा था कि कुछ समय बाद जिस इंसान को फांसी होने वाली है, वह इतना बेफिक कैसे है और अट्टहास कर कैसे मृत्यु की उपेक्षा कर रहा है।
5/5सजा सुनकर हंसे, जज कन्फ्यूज

जब जज ने फैसला पढ़कर सुनाया तो खुदीराम बोस मुस्कुरा दिए। जज को ऐसा लगा कि खुदीराम सजा को समझ नहीं पाए हैं, इसलिए मुस्कुरा रहे हैं। कन्फ्यूज होकर जज ने पूछा कि क्या तुम्हें सजा के बारे में पूरी बात समझ आ गई है। इस पर बोस ने दृढ़ता से जज को ऐसा जवाब दिया जिसे सुनकर जज भी स्तब्ध रह गया। उन्होंने कहा कि न सिर्फ उनको सिर्फ फैसला पूरी तरह समझ में आ गया है, बल्कि समय मिला तो वह जज को बम बनाना भी सिखा देंगे।

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