the 10,000 bedroom nazi hotel prora that was never used
(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/7Hotel Prora: दुनिया का सबसे बड़ा होटल जो था हिटलर का ड्रीम प्रॉजेक्ट

बाल्टिक सागर में रुगेन द्वीप पर दुनिया का सबसे बड़ा होटल है। इस होटल का नाम होटल प्रोरा है। इस होटल में 10,000 बेडरूम हैं और हर किसी का रुख समुद्र की ओर है। करीब 80 साल पहले इसको बनाया गया था और तब से अब तक यह खाली पड़ा है। यह होटल हिटलर का ड्रीम प्रॉजेक्ट था। आइए इस होटल के बारे में रोचक बातें आपको बताते हैं...
2/7नाजियों के स्ट्रेंथ थ्रू जॉय प्रोग्राम का हिस्सा

इस होटल को नाजियों ने अपने Strength through Joy प्रोग्राम के तहत बनवाया था। इसका मकसद था कि जर्मनी के कामगारों के लिए फुर्सत का शानदार पल बिताने के लिए गतिविधियों का आयोजन करना और नाजी प्रोपेगैंडा को फैलाना था। यह होटल इतना विशाल है कि इसे स्थानीय लोग Colossus कहते हैं। Colossus का मतलब है विशालकाय संरचना।
3/7भवन की संरचना

इस पूरे कंप्लेक्स में एक जैसी दिखने वाली 8 बिल्डिंग हैं जो 4.5 किलोमीटर में फैली हुई हैं। इसका निर्माण कार्य 1936 में शुरू हुआ था और तीन साल में यह प्रॉजेक्ट पूरा हुआ। इस होटल को बनाने में करीब 9,000 मजदूर लगे थे। नाजियों का ऐसे ही चार रिजॉर्ट बनाने का प्लान था। हर रिजॉर्ट में सिनेमा, फेस्टिवल हॉल, स्विमिंग पुल और क्रूज शिप के ठहरने के लिए जेटी के निर्माण की योजना था।
4/7हिटलर की महत्वाकांक्षा

हिटलर प्रोरा को दुनिया का सबसे बड़ा होटल बनाना चाहता था। वह चाहता था ऐसा विशालकाय रिजॉर्ट बनाया जाए जो दुनिया का अब तक का सबसे शक्तिशाली और सबसे बड़ा रिजॉर्ट हो। उसकी योजना 20,000 बिस्तरों वाले होटल बनाने की थी। हर कमरे का रुख समुद्र की ओर रखने का प्लान था। हर रूम का आकार 5x2.5 मीटर होना था जिसमें दो बिस्तर हो, एक वार्डरोब और एक सिंक हो। कंप्लेक्स के बीच में एक विशालकाय भवन बनाने की भी योजना थी जिसे जरूरत पड़ने पर युद्ध के समय में सैन्य अस्पताल में बदला जा सके।फोटो: साभार GettyImages
5/7युद्ध और प्रॉजेक्ट बीच में लटका

अभी बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हुआ था कि दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया। युद्ध छिड़ने के साथ ही हिटलर की प्राथमिकता बदल गई। उसने निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को हथियार बनाने के लिए भेज दिया। जब मित्र राष्ट्रों की सेना का हमला हुआ तो वहां हैम्बर्ग के शरणार्थियों ने आकर शरण ली। बाद में पूर्वी जर्मनी के शरणार्थी भी वहां आकर ठहरे। युद्ध के अंत तक उन बिल्डिंगों का इस्तेमाल महिला सहायक जवानों को रखने के लिए किया गया।फोटो: साभार GettyImages
6/7युद्ध के बाद

युद्ध के बाद प्रोरा का इस्तेमाल पूर्वी जर्मनी की सेना के लिए सैन्य चौकी के तौर पर किया गया। 1990 में जर्मनी के एकीकरण के बाद इसके कुछ हिस्से का इस्तेमाल मिलिट्री टेक्निकल स्कूल के तौर पर किया गया। फिर बाद में बाल्कन के शरणार्थी यहां आकर ठहरे।फोटो: साभार GettyImages
7/7अब भी सुंदर

कुछ ब्लॉक इसके खंडहर हो गए हैं। उनको छोड़कर होटल का बाकी हिस्सा अब भी बहुत सुंदर लगता है। 2011 में प्रोरा के एक ब्लॉक को हॉस्टल में बदल दिया गया जिसमें 400 बेड हैं।फोटो: साभार GettyImages

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