major shaitan singh the war hero who saved ladakh in indo china war
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1/7मेजर शैतान सिंह: जांबाज जिन्होंने लद्दाख को बचाया, पढ़ें पराक्रम की पूरी कहानी

18 नवंबर देश के इतिहास का एक अहम दिन है। इस दिन देश का एक ऐसा वीर सपूत शहीद हुआ था, जिसने लद्दाख को बचाया था. उस वीर सपूत का नाम है मेजर शैतान सिंह। रेजांगला के युद्ध में उनके 120 जवानों ने 1300 चीनी सैनिकों को मार गिराया था। आइए आज उनके पराक्रम की कहानी आपको सुनाते हैं...
2/7युद्ध की कहानी

18 नवंबर, 1962 की सुबह। लद्दाख की चुशुल घाटी बर्फ से ढंकी हुई थी। माहौल में एक खामोशी सी थी। लेकिन यह खामोशी ज्यादातर तक नहीं रह सकी। 03.30 बजे तड़के सुबह घाटी का शांत माहौल गोलीबारी और गोलाबारी से गूंज उठा। बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और तोप के साथ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के करीब 5,000 से 6,000 जवानों ने लद्दाख पर हमला कर दिया था। मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व वाली 13 कुमाऊं की एक टुकड़ी चुशुल घाटी की हिफाजत पर तैनात थी। भारतीय सैन्य टुकड़ी में मात्र 120 जवान थे जबकि दूसरी तरफ दुश्मन की विशाल फौज। ऊपर से बीच में एक चोटी दीवार की तरह खड़ी थी जिसकी वजह से हमारे सैनिकों की मदद के लिए भारतीय सेना की ओर से तोप और गोले भी नहीं भेजे जा सकते थे। अब 120 जवानों को अपने दम पर चीन की विशाल फौज और हथियारों का सामना करना था। हमारे सैनिक कम थे और उनके पास साजोसामान की कमी थी लेकिन उनका हौसला बुलंद था। 13 कुमाऊं के वीर सैनिकों ने जो संभव हो सका, उतना ही सही जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
3/7मेजर शैतान सिंह का पराक्रम

युद्ध के दौरान मेजर शैतान सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने सैनिकों का हौसला बनाए रखा और गोलियों की बौछार के बीच एक प्लाटून से दूसरी प्लाटून जाकर सैनिकों का नेतृत्व किया। इसी दौरान उनके कई गोलियां लग गईं। ज्यादा खून बह जाने पर उनके दो साथी जब उन्हें उठाकर ले जा रहे थे तभी चीनी सैनिकों ने उन पर मशीन गन से हमला कर दिया। मेजर को लगा कि उन सैनिकों की जान भी खतरे में है, इसलिए उन दोनों को पीछे जाने का आदेश दिया। मगर उन सैनिकों ने उन्हें एक पत्थर के पीछे छिपा दिया। बाद में इसी जगह पर उनका पार्थिव शरीर मिला। जिस वक्त उन्हें ढूंढा गया, उस वक्त भी उनके हाथ में उनकी बंदूक थी और पकड़ ढीली नहीं हुई थी।
4/7चीन के 1300 सैनिकों को मौत के घाट उतारा

रेजांग ला युद्ध में चीनी सैनिकों से लोहा लेने के बाद जब भारतीय सैनिकों के हथियार खत्म हो गए, तो उन्होंने हाथों से लड़ना शुरू कर दिया और 1300 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। 123 में से 114 सैनिक शहीद हो गए, इन्हीं में मेजर शैतान सिंह भी थे। बाकी 9 सैनिक बंदी बना लिए गए थे। भारतीय सैनिकों के इस पराक्रम के आगे चीनी सेना को भी झुकना पड़ा और अंततः 21 नवंबर को उसने सीजफायर का ऐलान कर दिया।
5/7कौन थे मेजर शैतान सिंह?

मेजर शैतान सिंह भाटी का जन्म 1 दिसंबर, 1924 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ था। उनका संबंध सैन्य परिवार से था। उनके पिता आर्मी अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह भाटी थे। उनको 1 अगस्त, 1949 को कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन मिला था। 1962 के भारत-चीन युद्ध में उनको अपना पराक्रम दिखाने का मौका मिला।
6/7परमवीर चक्र से सम्मानित

मेजर शैतान सिंह के पार्थिव शरीर को जोधपुर स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया गया, जहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनकी इस बहादुरी के लिए सरकार ने उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया। उनका पराक्रम आज भी भारतीय सेना के इतिहास का गौरवशाली हिस्सा है।
7/7रेजांग ला का युद्ध नाम क्यों पड़ा?

रेजांग ला जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र में चुशुल घाटी में एक पहाड़ी दर्रा है। 1962 के युद्ध में 13 कुमाऊं दस्ते का यह अंतिम मोर्चा था। इसीलिए इसे रेजांग ला युद्ध के नाम से जाना जाता है।

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