न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 29 Oct 2019 06:30 AM IST
मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक
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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने में जुटे मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसके कार्यान्वयन को लेकर छह सूत्री रोडमैप पेश किया है। इसके साथ ही 2030 में कार्यान्वयन की व्यापक समीक्षा करने का फैसला किया है। कुछ राज्यों और हितधारकों द्वारा शिक्षा नीति के मसौदे पर सवाल उठाने के बाद मंत्रालय ने कहा कि कोई भी नीति तभी सफल होती है, जब उसका कार्यान्वयन सही तरीके से किया जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतिम मसौदे के मुताबिक, पहला नीति की भावना और मंशा का कार्यान्वयन सबसे महत्वपूर्ण है। दूसरा, चरणबद्ध तरीके से नीति की पहलों को लागू किया जाना आवश्यक है क्योंकि प्रत्येक नीति बिंदु के कुछ चरण होते हैं। इनमें से प्रत्येक में पिछले कदम को सफलतापूर्वक लागू करने की जरूरत होती है। तीसरा, नीति के सर्वोत्कृष्ट अनुक्रमण के लिए प्राथमिकता तय करना जरूरी होगा और सबसे अहम व जरूरी कदम पहले उठाए जाएंगे, जिससे एक मजबूत आधार बन सकेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतिम मसौदे के मुताबिक, पहला नीति की भावना और मंशा का कार्यान्वयन सबसे महत्वपूर्ण है। दूसरा, चरणबद्ध तरीके से नीति की पहलों को लागू किया जाना आवश्यक है क्योंकि प्रत्येक नीति बिंदु के कुछ चरण होते हैं। इनमें से प्रत्येक में पिछले कदम को सफलतापूर्वक लागू करने की जरूरत होती है। तीसरा, नीति के सर्वोत्कृष्ट अनुक्रमण के लिए प्राथमिकता तय करना जरूरी होगा और सबसे अहम व जरूरी कदम पहले उठाए जाएंगे, जिससे एक मजबूत आधार बन सकेगा।
चौथा, चूंकि नीति समग्र है और आपस में जुड़ी है, ऐसे में पूर्ण कार्यान्वयन जरूरी है, न कि टुकड़ों में। यह सुनिश्चित करेगा कि इसके उद्देश्य पूरे हो सकें। पांचवां, शिक्षा एक समवर्ती विषय है, लिहाजा इसे केंद्र और राज्यों के बीच सजग योजना, संयुक्त निगरानी और सहयोगात्मक कार्यान्वयन की जरूरत होगी। अंतिम, सभी पहलुओं को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए समानांतर कार्यान्वयन चरणों के बीच सावधानीपूर्वक विश्लेषण और समीक्षा जरूरी होगी।

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