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1/10Boss Day: बॉस से हैं परेशान? एक्सपर्ट ने बताया कैसे बनें उनके खास

कहते हैं अच्छी जॉब मिलना आपकी मेहनत और काबिलियत की बात है और अच्छे बॉस मिलना किस्मत की। ऑफिस में कई सारे प्रेशर्स के अलावा सबसे मुश्किल काम होता है बॉस को डील करना। अच्छे बॉस में कुछ क्वॉलिटीज मानी जाती हैं जैसे वे एंप्लॉयीज से कम्युनिकेशन गैप नहीं रखते, तुरंत डिसीजन लेते हैं, सामने वाले की बात को सुनते हैं और साथ मिलकर काम करते हैं। हालांकि कुछ ऐसे बॉसेज भी होते हैं जो आपके दिल में रहने के बजाय हमेशा दिमाग में रहते हैं। बॉस डे पर साइकियाट्रिस्ट अलीम सिद्दीकी ने बताए कुछ ऐसे तरीके जिनसे आप हर तरह के बॉस के दिल में जगह बना सकते हैं... (नवभारत टाइम्स.कॉम के लिए काजल शर्मा की रिपोर्ट)
2/10खुद को सुपर से ऊपर समझने वाले बॉस

ऐसे बॉस बस एंप्लॉयीज पर चिल्लाने का बहाना ढूंढ़ते रहते हैं। इन्हें आप सुपीरियॉरिटी कॉम्प्लैक्स से ग्रस्त बॉस भी मान सकते हैं। उनको लगता है कि बस वे ही सही हैं सामने वाला गलत है। कोई गलती हो जाने पर वह इसकी वजह जानने की कोशिश भी नहीं करते बस बरसना शुरू कर देते हैं।
3/10कैसे करें डील

डॉ सिद्दीकी बताते हैं कि जो लोग ज्यादा गुस्सा करते हैं और चिड़चिड़ाते हैं दरअसल उनका कॉन्फिडेंस खुद ही कम होता है। उनको खुद बात-बात पर ऐंग्जाइटी होती है जिससे डील करते-करते उनके मिजाज में गुस्सा आ जाता है। जरूरी है कि आप अपना काम टाइम पर और सही करें ऐसे में चांसेज होते हैं कि सामने वाला आपको कम परेशान करता है। अगर बहुत हावी हो रहा है तो किसी अनऑफिशल मीटिंग में खाली वक्त में उन्हें बता सकते हैं कि सर थोड़ा आराम से बता दिया कीजिए बुरा लगता है। पानी सिर से ऊपर जाए तो एचआर को लेटर लिख सकते हैं।
4/10वर्कहॉलिक बॉस

सबसे पहले वर्कहॉलिक होने और हार्ड वर्किंग होने में अंतर समझना होगा। हार्ड वर्किंग लोग काम, फैमिली, फ्रेंड्स वगैरह में बैलेंस बनाकर चलते हैं। वहीं वर्कहॉलिक लोगों को काम के प्रति सनक होती है। ऐसे बॉस पूरी रात रुककर भी किसी प्रॉजेक्ट को पूरा करते हैं और आपसे भी ऐसी उम्मीद कर सकते हैं।
5/10डील

डॉक्टर सिद्दीकी बताते हैं, अपना काम पर्फेक्ट रखें और टाइम मैनेज करके काम पूरा करें। ऐसा न हो कि बॉस काम के लिए किडनी तक बेचने की उम्मीद करें और आप पूरा करते रहें, काम को लेकर भी बाउंड्रीज तय करें जितना वक्त जरूरी हो उतना ही वक्त दें।
6/10इंस्पिरेशनल बॉस

कुछ बॉस ऐसे भी होते हैं तो बेहद इंस्पिरेशनल होते हैं। लोग इनको फॉलो और रिस्पेक्ट करते हैं। ऐसे बॉसेज एंप्लॉयी के लिए एग्जाम्पल सेट करते हैं। ये लोगों से जल्दी घुलमिल भी जाते हैं।
7/10डील

अगर आपके बॉस इंस्पिरेशनल है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अपनी तरफ से ढीले पड़ जाएं। ऐसे बॉस के साथ आपको बराबरी से मेहनत करनी पड़ती है। वह कंपनी की प्रोफाइल ऊंची करने में मेहनत करते हैं तो आपको भी उनसे कदम मिलाना होगा। अच्छी बात यह है कि इनके साथ काम करने में आप ट्रॉमाटाइज्ड फील नहीं करते।
8/10समझें बॉस एंप्लॉई का रिलेशन

बॉस को अगर साइकलॉजिकल टर्म में देखें तो इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन का एक ऐसा रिलेशन है जिसमें बॉस और सबऑर्डिनेट को तालमेल बैठाना होता है। इस रिलेशनशिप में बॉस के पास सुविधाएं ज्यादा हैं, पोजिशन पावर में वह ज्यादा है, उसके पास कमांडिंग पावर ज्यादा है, इस वजह से दो लोगों की जो बातचीत या इंटरैक्शन प्रभावित होता है। यह मानकर चलें कि कमांडिग पोजिशन उनके पास है और आपको उसकी बात माननी है ताकि सिस्टम सही तरीके से चले। लेकिन बॉस को यह नहीं समझना चाहिए कि वह मालिक है या वही सही है।
9/10समय और माहौल के हिसाब से बदल सकता है व्यवहार

पर्सनैलिटी ट्रेट्स समय, माहौल और बैकग्राउंड के हिसाब से बदल सकते हैं मतलब जो बंदा आज आपको डांट रहा है, कल प्रोत्साहन भी कर सकता है। इनको किसी किसी खास कैटिगरी में न डालें कह सकते हैं कि आमतौर पर बॉस मोटिवेट करने वाले ही होते हैं पर इनमें दूसरी चीजें भी आ सकती हैं। लेकिन कुछ लोगों की पर्सनैलिटी के कुछ खास लक्षण होते हैं जिनके हिसाब से हमें तय करना होता है कि हम कैसे तालमेल बिठाएं।
10/10बॉस के साथ पार्टी भी जरूरी

डॉ सिद्दीकी सजेस्ट करते हैं कि ऑफिस में इनफॉर्मल ऐक्टिविटीज जरूरी हैं। मान लीजिए आप बॉस और सीनियर्स के साथ हमेशा काम ही करते रहते हैं तो वह आपको सिर्फ काम निकलवाने का टूल समझते रहते हैं, वहीं आप उनके साथ पार्टी करते हैं, पिकनिक या मूवी वगैरह जाते हो तो वह आपको एक पर्सन के तौर पर भी देखते हैं। ऐसे में ऑफिस का माहौल और काम करने वाले की बॉन्डिंग बेहतर होती है। (डॉ अलीम सिद्दीकी: एमडी, डीपीएम, एडिटर आईएमए लखनऊ, डायरेक्ट काउंसिल मेंबर इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के मेंबर हैं।)

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