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(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/6बहादुर शाह जफर से जुड़े रोचक किस्से

भारत के आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर का आज ही के दिन यानी 24 अक्टूबर को जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम मिर्जा अबू जफर सिराजुद्दीन मुहम्मद बहादुर शाह जफर था। सितंबर 1837 में पिता अकबर शाह द्वितीय की मौत के बाद उन्हें गद्दी मिली। आज हम आपको मुगल बादशाह से जुड़े कुछ रोचक किस्से बता रहे हैं...
2/6कई चीजों में ली ट्रेनिंग

बचपन में जफर ने उर्दू, फारसी और अरबी में तालीम हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने घुड़सवारों की कला, तलवारबाजी, धनुष-बाण के साथ निशानेबाजी की भी ट्रेनिंग ली।
3/6विद्रोह ने जफर को बनाया आजादी का सिपाही

सन 1857 में ब्रिटिशों ने तकरीबन पूरे भारत पर कब्जा जमा लिया था। उनके आक्रमण से तिलमिलाए विद्रोही सैनिक और राजा-महाराजाओं को एक केंद्रीय नेतृत्व की जरूरत थी जो बहादुर शाह जफर के रूप में पूरी हुई। हालांकि, 82 वर्ष के बूढ़े शाह जफर जंग हार गए और अपने जीवन के आखिरी वर्ष उन्हें अंग्रेजों की कैद में गुजारने पड़े।
4/6शायर थे बहादुर शाह जफर

बहादुर शाह जफर शेरो-शायरी को बेहद पसंद करते थे और उनके दरबार के दो शीर्ष शायर मोहम्मद गालिब और जौक आज भी शायरों के लिए आदर्श हैं। जफर खुद एक बेहतरीन शायर थे। उनके शेरों में मानव जीवन की सच्चाइयां और भावनाएं बसती थीं।
5/6तीलियों से दीवार लिखीं गजलें

रंगून में अंग्रेजों की कैद में रहते हुए भी उन्होंने ढेर सारी गजलें लिखीं। बतौर कैदी, जफर को कलम तक नहीं दी गई तो उन्होंने जली हुई तीलियों से दीवार पर गजलें लिखीं।
6/6जफर को चुपचाप किया गया दफन

बर्मा में अंग्रेजों की कैद में ही 7 नवंबर 1862 की सुबह बहादुर शाह जफर की मौत हो गई। उन्हें उसी दिन जेल के पास ही श्वेडागोन पैगोडा के पास दफना दिया गया। उनकी कब्र के चारों ओर बांस की बाड़ लगा दी गई और कब्र को पत्तों से ढंक दिया गया। ब्रिटिश हिंदुस्तान पर चार दशक से राज करने वाले मुगलों के आखिरी बादशाह के अंतिम संस्कार को ज्यादा ताम-झाम नहीं देना चाहते थे।(तस्वीरें साभार: इंटरनेट)

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