ये तय मान लीजिए कि जो रिजल्ट आ रहा है उसे आप बदल नहीं सकते. इसलिए बच्चों के साथ विकल्प पर बात करें. मतलब एक दरवाजा बंद हो गया तो दूसरा रास्ता क्या है. सीबीएसई और यूपी बोर्ड सहित कई प्रदेशों के बोर्ड के रिजल्ट जारी होने वाले हैं. ऐसे में रिजल्ट के तनाव से बच्चों और घर के माहौल को कैसे दूर रखें, इस बारे में हमने एक्सपर्ट से बातचीत की.

प्रतीकात्मक फोटो
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक डॉ. केसी गुरनानी 1. जब बच्चा सड़क पर चलते हुए गिर रहा होता है तो हम उसे डांटने की बजाय संभालते हैं. ठीक इसी तरह से रिजल्ट खराब होने पर उसे डांटने की बजाय संभालें.
2. पहले फेल और फिर कामयाब होने वाली महान हस्तियों के उदाहरण बच्चों के सामने रखें.
3. रिजल्ट के बाद बच्चे को अकेले न छोड़ें.
4. जैसे ही महसूस हो कि बच्चे का व्यवहार बदल रहा है तो मनोचिकित्सक और काउंसलर्स से संपर्क करें.5. रिजल्ट आने से पहले बच्चे के साथ पहले से तय लक्ष्य पर नहीं, उसके विकल्प पर बात करें.
6. अच्छा रिजल्ट आने पर आपने बच्चे को जो देने का वादा किया था उसे तोड़ें नहीं. उससे कम या कुछ समय बाद उसे दें जरूर. वर्ना रिजल्ट खराब होने के साथ ही बच्चे के दिमाग में ये बात भी चुभती हैं.
7. इंसानी दिमाग कभी भी संतुष्ट नहीं होता. यही वजह है कि कभी-कभी टॉपर भी आत्महत्या कर लेते हैं.

फाइल फोटो.
समाजशास्त्री प्रो. डॉ. मोहम्मद अरशद की सलाह
1 बच्चे का जो भी रिजल्ट आए उसका उत्साहवर्धन करें उसे डांटे नहीं.
2. रिजल्ट खराब आने पर दूसरों बच्चों से अपने बेटे या बेटी की तुलना बिल्कुल न करें.
3. रिजल्ट खराब आने पर घर के माहौल को सामान्य बनाए रखें. रिजल्ट के बारे में कुछ दिन बाद ही चर्चा करें.
4. कुछ लोग भविष्य में और बेहतर करने के लिए बच्चे पर प्रेशर बनाने लगते हैं. ऐसा कतई न करें. बच्चों को कुछ समय नॉर्मल रहने दें.
5. रिजल्ट खराब आने पर अभिभावक यह सोचने लगते हैं कि दूसरे क्या सोचेंगे. आप खुद को यह विश्वास दिलाएं कि मेरे मेरे बच्चे का रिजल्ट अच्छा आया है और आने वाले वक्त में बच्चे के साथ और मेहनत करनी है.
6. एक बात अच्छी तरह से जान लें कि स्कूल का हर बच्चा टॉपर नहीं हो सकता.
7. एक बात ये भी तय है कि बच्चे के रिजल्ट का सामाजिक प्रतिष्ठा बनाने-बिगाड़ने में कोई रोल नहीं होता.
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