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birthday special freedom fighter kalpana dutta

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पुरुष बनकर था जेल उड़ाने का प्लान

पुरुष बनकर था जेल उड़ाने का प्लान

भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाने वाले लोगों में आपने महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे कई लोगों का नाम सुना होगा। मगर कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनका नाम चर्चित नहीं हुआ लेकिन उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। ऐसा ही एक नाम है कल्पना दत्त। 2010 में आशुतोष गोवारिकर ने उनके जीवन पर आधारित फिल्म 'खेलें हम जी जान से' बनाई। फिल्म में दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन ने लीड रोल प्ले किया था। आज उनका जन्मदिन है, जानें उनसे जुड़ी कुछ बातें।

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भारत की वीर महिला

भारत की वीर महिला

भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाने वाले लोगों में आपने महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे कई लोगों का नाम सुना होगा। मगर कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनका नाम चर्चित नहीं हुआ लेकिन उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। ऐसा ही एक नाम है कल्पना दत्त। 2010 में आशुतोष गोवारिकर ने उनके जीवन पर आधारित फिल्म 'खेलें हम जी जान से' बनाई। फिल्म में दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन ने लीड रोल प्ले किया था। आज उनका जन्मदिन है, जानें उनसे जुड़ी कुछ बातें।

कल्पना दत्त 27 जुलाई 1919 को चटगांव के गांव श्रीपुर में पैदा हुई थीं। यह गांव अब बांग्लादेश के हिस्से में है। आजादी की लड़ाई में कल्पना का रोल काफी अहम था, जिसके चलते उन्हें वीर महिला की उपाधि भी दी गई।

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क्रांतिकारियों का गहरा प्रभाव

क्रांतिकारियों का गहरा प्रभाव

कल्पना चटगांव से बेसिक शिक्षा लेने के बाद 1929 में कलकत्ता चली गई थीं। वहां उन्होंने बीएससी में ऐडमिशन लिया और क्रांतिकारियों की कहानियां पढ़कर प्रभावित हुईं। इन कहानियों ने उन पर गहरा प्रभाव डाला और वह छात्रसंघ से जुड़कर खुद देश की आजादी के लिए क्रांतिकारी कामों में रुचि लेने लगीं।







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सूर्य सेन से हुई मुलाकात

सूर्य सेन से हुई मुलाकात

इसी बीच कल्पना की मुलाकात क्रांतिकारी सूर्यसेन के दल से हुई। सूर्य सेन को मास्टर दा के नाम से भी जाना जाता है। उनके संगठन 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' से जुड़कर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 1930 में इस दल ने सूर्यसेन के नेतृत्व में चटगांव शास्त्रागार लूट लिया। इसके बाद वह अंग्रेजों की नजर में आ गईं तो उन्हें पढ़ाई छोड़कर चटगांव आना पड़ा। वह वहीं से इस दल के चुपचाप संपर्क में रहीं। उनके साथ के कई क्रांतिकारी गिरफ्तार कर लिए गए।

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जेल की दीवार उड़ाने का बनाया प्लान

जेल की दीवार उड़ाने का बनाया प्लान

कल्पना अपना वेष बदलकर कलकत्ता से विस्फोटक सामग्री ले जाने लगीं और संगठन के लोगों को हथियार पहुंचाने लगीं। वह पुरुष के वेष में ये सब काम कर रही थीं। उन्होंने साथियों को आजाद कराने की योजना बनाई। इसके लिए जेल की अदालत की दीवार को बम से उड़ाने का प्लान बनाया। लेकिन पुलिस को योजना का पता चल गया। वह वेष बदलकर घूमती फिर रही थीं और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अभियोग सिद्ध न होने पर उन्हें छोड़ दिया गया। पुलिस का घर पर पहरा होने के बावजूद वह उनकी आंखों में धूल झोंककर भाग गईं। सूर्य सेन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और 1933 में कल्पना भी गिरफ्तार हो गईं।

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गिरफ्तार हुईं कल्पना

गिरफ्तार हुईं कल्पना

क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला और 1934 में सूर्य सेन को फांसी की सजा दी गई और कल्पना दत्त को आजीवन कारावास की सजा हो गई। सितंबर 1931 को कल्पना और उनके जैसी क्रांतिकारी प्रीतिलता ने हुलिया बदलकर चटगांव यूरोपियन क्लब पर हमला करने का फैसला किया। वह लड़के के वेष में योजना को अंजाम देने जा रही थीं तब तक पुलिस को उनकी योजना के बारे में पता चल गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

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1995 में हुआ निधन

 1995 में हुआ निधन

गांधीजी और रवींद्रनाथ टैगोर की कोशिशों के बाद कल्पना जेल से बाहर आ गईं। जेल से आकर उन्होंने पढ़ाई पूरी की और कम्युनिस्ट नेता पूरन चंद जोशी से उनकी शादी हो गई। 1979 में उन्हें वीर महिला की उपाधि दी गई। 8 फरवरी 1995 को दिल्ली में कल्पना का निधन हो गया।




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