(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
2/8हाथी से कुचलना
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हाथी से कुचलकर मौत की सजा देना प्राचीन भारत में दंड का काफी प्रचलति तरीका था। दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों में भी इस तरह की सजा दी जाती थी। सजा पाए आरोपी को एक जगह पर लाया जाता है जहां बड़ी संख्या में लोग जमा होते थे। लोगों की हत्या करने या टॉर्चर करने में प्रशिक्षित हाथियों को लाया जाता था। हाथी को उस इंसान को कुचलने के लिए छोड़ दिया जाता था।
3/8शरीर के आर-पार लाठी या भाला
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यह सजा खासतौर पर राजद्रोह के दोषियों को दी जाती थी या शासक वर्ग के खिलाफ बगावत करने वालों को। किसी नुकीली चीज जैसे भाला, डंडा या बांस को सजा पाए इंसान के शरीर के आर-पार किया जाता था।
(फोटो: साभार Educalingo)
4/8पहिये से बांधकर घुमाना
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इस तरह की सजा भी मध्यकाल में काफी प्रचलित थी। सजा पाए इंसान को लकड़ी के पहिए में बांधकर घुमाया जाता था। धीरे-धीरे उसकी हड्डियां टूटने लगती और इंसान दर्दनाक मौत मर जाता।
(फोटो: साभार Medieval Chronicles)
5/8चमड़ी उधेड़ना
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आपने अभी भी किसी को धमकी देते सुना होगा कि चमड़ी उधेड़ दूंगा या खाल निकाल दूंगा। हालांकि कोई कहता तो इसका मतलब ऐसा करता नहीं है। लेकिन प्राचीन काल में ऐसा होता था। सजा के तौर पर किसी जिंदा इंसान की चमड़ी उधेड़ी जाती थी। मेसोपोटामिया में इस तरह की सजा काफी आम थी। चमड़ी निकाले जाने के बाद अधिकतर लोगों की मौत हो जाती थी। अगर कुछ लोग बच जाते थे तो वह मानसिक रूप से विकलांग हो जाते थे।
(फोटो: साभार The National Gallery, London)
6/8पीतल का बैल
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ब्रैजन बुल का आविष्कार सिसली में हुआ था। इसलिए इसको सिसिलियन बुल भी कहा जाता था। सजा के इस तरीके का ईजाद ग्रीस में हुआ था। यह सजा कुछ इस तरह दी जाती थी। हू-ब-हू बैल जैसी पीतल की एक आकृति बनाई जाती थी। उस आकृति के अंदर सजा पाए इंसान को डाल दिया जाता था। आकृति के नीचे आग जला दी जाती थी। फिर पीतल के बैल को तब तक गर्म किया जाता था, तब तक उसके अंदर रखा हुआ इंसान भूना न जाए। इस उपकरण के अंदर ऐसा सिस्टम होता था कि सजा पाए इंसान की चीख को बैल की आवाज में बदल देता था।
(फोटो: साभार YouTube)
7/8चूहे का इस्तेमाल
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अभी भी कई जगह लोगों को टॉर्चर करने या मारने के लिए चूहे का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब ऐसा कम होता है। प्राचीन काल में इस तरह की सजा आम थी। पहले चूहों को एक पिंजरे में बंद कर दिया जाता था। फिर उस पिंजरे को आरोपी के शरीर पर छोड़ दिया जाता था। पिंजरे के दूसरे किनारे को गर्म किया जाता था। दूसरी तरफ गर्मी होने के वजह से बंद हो जाता था। इससे चूहा आरोपी का मांस खाना शुरू कर देता था। कुछ सजाओं में एक थैली में चूहे डालकर आरोपी के मुंह में बांध दिया जाता था।
8/8क्रुसिफिकेशन या सूली पर चढ़ाया जाना
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लकड़ी के क्रॉस के साथ मुलजिम को बांध दिया जाता था। फिर उसे खुले में छोड़ दिया जाता था, जहां वह तड़प-तड़पकर मरता था। मध्यकाल में किसी तरह का अपराध करने वाले या शासक वर्ग का विरोध करने वालों को ऐसी ही सजा दी जाती थी। इससे दूसरे लोगों के दिल में भी खौफ पैदा होता था। वे किसी तरह का अपराध करने से डरते थे या फिर शासक वर्ग के खिलाफ जुबान खोलने से हिचकते थे।
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