एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 19 Jan 2021 01:39 PM IST
राजीव कुमार, उपाध्यक्ष, नीति आयोग
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भारत सरकार के सबसे बड़े थिंक टैंक और योजना सलाहकार नीति आयोग के प्रमुख डॉ राजीव कुमार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वन के लिए एक जनांदोलन की जरूरत पर जोर दिया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को क्रियान्वित करने के लिए एक जनांदोलन की जरूरत है, जो शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है। नीति आयोग पूर्ववर्ती योजना आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार नीति आयोग एवं भारतीय शिक्षण मण्डल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित शैक्षणिक नेतृत्व विषयक वेब गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
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इस ई-गोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से लगभग 300 कुलपतियों ने भाग लिया था। इस अवसर पर डॉ राजीव कुमार ने भारतीय बौद्धिक संपदा को विदेशी ताकतों के हाथों में जाने से रोकने एवं उन्हें सुरक्षित रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह नई शिक्षा नीति न सिर्फ शैक्षणिक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगी, अपितु विश्व में प्राचीन भारतीय शिक्षण गौरव को स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। डॉ राजीव कुमार ने कहा कि किसी भी समाज के निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका होती है क्योंकि शिक्षक ही समाज को सही दिशा देने की क्षमता रखता है। अपनी सृजनात्मक क्षमता के जरिये वह न सिर्फ समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है अपितु नवाचारों को स्थापित करके नए शैक्षिक वातावरण का निर्माण भी कर सकता है।
यह भी पढ़ें : राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी ट्रंप को मानने पड़ेंगे ये सख्त नियमगोष्ठी के दौरान भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल नीति आयोग के साथ मिलकर एक ऐसे शैक्षिक परिवेश के निर्माण में लगा है, जिसके मूल में भारतीय संस्कृति हो एवं जिसमें भारतीयता का बोध निहित हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक अपनी रचनात्मकता एवं सृजन क्षमता से नए भारत के निर्माण में सर्वाधिक योगदान देने की क्षमता रखता है।
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वहीं, भारतीय शिक्षण मंडल के अध्यक्ष प्रो सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाना है तो हमें भारतीय परम्पराओं पर आधारित शिक्षा पद्धति को केंद्र में रखना होगा साथ ही मैकाले पद्धति से भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मुक्त कराना होगा। जोशी ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान सुयोग्य एवं क्षमतावान शिक्षक से होती है, न कि ढांचागत संरचना से। शिक्षक का स्थान कभी भी अन्य कोई नहीं ले सकता, चाहे हम कितनी भी तकनीकी तरक्की कर लें। जोशी ने कहा कि शिक्षक न सिर्फ ज्ञान का केंद्र होता है अपितु वह संस्कार का भी केंद्र होता है। इस अवसर पर जोशी ने सर्वश्रेष्ठ बौद्धिक संपदा को प्रेरित करने की बात कही, जिससे शिक्षण दायित्व के निर्वहन के लिए उन्हें प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया जा सके।
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भारत सरकार के सबसे बड़े थिंक टैंक और योजना सलाहकार नीति आयोग के प्रमुख डॉ राजीव कुमार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वन के लिए एक जनांदोलन की जरूरत पर जोर दिया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को क्रियान्वित करने के लिए एक जनांदोलन की जरूरत है, जो शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है। नीति आयोग पूर्ववर्ती योजना आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार नीति आयोग एवं भारतीय शिक्षण मण्डल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित शैक्षणिक नेतृत्व विषयक वेब गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
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इस ई-गोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से लगभग 300 कुलपतियों ने भाग लिया था। इस अवसर पर डॉ राजीव कुमार ने भारतीय बौद्धिक संपदा को विदेशी ताकतों के हाथों में जाने से रोकने एवं उन्हें सुरक्षित रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह नई शिक्षा नीति न सिर्फ शैक्षणिक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगी, अपितु विश्व में प्राचीन भारतीय शिक्षण गौरव को स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। डॉ राजीव कुमार ने कहा कि किसी भी समाज के निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका होती है क्योंकि शिक्षक ही समाज को सही दिशा देने की क्षमता रखता है। अपनी सृजनात्मक क्षमता के जरिये वह न सिर्फ समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है अपितु नवाचारों को स्थापित करके नए शैक्षिक वातावरण का निर्माण भी कर सकता है।
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वहीं, भारतीय शिक्षण मंडल के अध्यक्ष प्रो सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाना है तो हमें भारतीय परम्पराओं पर आधारित शिक्षा पद्धति को केंद्र में रखना होगा साथ ही मैकाले पद्धति से भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मुक्त कराना होगा। जोशी ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान सुयोग्य एवं क्षमतावान शिक्षक से होती है, न कि ढांचागत संरचना से। शिक्षक का स्थान कभी भी अन्य कोई नहीं ले सकता, चाहे हम कितनी भी तकनीकी तरक्की कर लें। जोशी ने कहा कि शिक्षक न सिर्फ ज्ञान का केंद्र होता है अपितु वह संस्कार का भी केंद्र होता है। इस अवसर पर जोशी ने सर्वश्रेष्ठ बौद्धिक संपदा को प्रेरित करने की बात कही, जिससे शिक्षण दायित्व के निर्वहन के लिए उन्हें प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया जा सके।
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