क्या है योजना
प्रस्ताव के अनुसार, डीयू (DU) के तीन साल के ऑनर्स कोर्सेस को चार साल का बनाया जाएगा। यानी स्टूडेंट्स को तीन साल में ऑनर्स की डिग्री नहीं मिल पाएगी। अगर कोई स्टूडेंट पहले या दूसरे साल के बाद कोर्स छोड़ देता है, तो उसे क्रमशः सर्टिफिकेट व डिप्लोमा दिया जाएगा। चार साल पूरे करने पर ही ऑनर्स की डिग्री मिलेगी। ऐसे लैंग्वेज कोर्सेस और छोटे विभाग बंद हो जाएंगे जो ऑनर्स कोर्सेस ऑफर नहीं करते।
क्यों हो रहा है विरोध
गौरतलब है कि डीयू ने 2014 में भी चार साल के यूजी प्रोग्राम्स (FYUP) शुरू किए थे। लेकिन स्टूडेंट्स और टीचर्स के भारी विरोध के बाद सरकार ने उसी साल इसे रद्द कर दिया था। अब कई शिक्षकों का कहना है कि दोबारा चार साल के प्रोग्राम्स शुरू करके डीयू फिर से वही गलती दोहराएगा।
एकेडेमिक काउंसिल की सदस्य सीमा दास ने कहा, 'मेरा सुझाव है कि तीसरे साल तक प्रमुख विषयों की संख्या कम न की जाए। ताकि अगर कोई स्टूडेंट चौथे साल में रिसर्च करना चाहे, तो उन विषयों की नॉलेज रिसर्च के लिए उन्हें जरूरी फाउंडेशन देगी।'
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सेंट स्टीफेंस कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर नंदिता नारायण ने कहा कि 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डीयू ने अपनी पिछली असफलता से सबक नहीं ली। खासकर शैक्षणिक सुधार की दिशा में। नई शिक्षा नीति के चार साल डिग्री प्रोग्राम्स में कई मिली-जुली चीजें हैं। यूनिवर्सिटी को बिना स्टूडेंट्स व टीचर्स से विचार-विमर्श किए जल्दबाजी में ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।'

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