एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 30 Jul 2020 04:17 AM IST
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पांच साल की उम्र तक बच्चों को बालवाटिका और आंगनबाड़ी में खेल-खेल में पढ़ाया जाएगा। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य की भी जांच होगी। आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्कूलों में ये सुविधा पहले से है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ईसीसीई के अनुसार छह माह तक प्रशिक्षित किया जाएगा और उन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जो 12वीं से कम पढ़े लिखे होंगे उन्हें एक साल का डिप्लोमा दिया जाएगा जिसमें उन्हें ईसीसीई के मानदंडों में शामिल पढ़ाने के तौर तरीकों के बारे में सिखाया जाएगा।
सुविधाओं से लैस होंगे आंगनबाड़ी
ईसीसीई ऐसी प्रणाली है जिससे बच्चा आसानी से चीजों को अलग-अलग तरीके से सीखता है। इसके लिए शब्दों, भाषा, आकार, रंग, संख्या, तार्किक सोच, कला, क्त्रसफ्ट, ड्रामा और न जाने कितने तरीकों से वो खुद को रोचक तरीके से तराश सकता है। ईसीसीई के तहत एनसीईआरटी बच्चों और अभिभावकों के लिए कई बिंदु तैयार करेगा जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले। जिला स्तर पर अधिक ध्यान होगा विशेषतौर पर वहां जो पिछडे़ हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों को सभी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। जहां प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती के साथ मूलभूत सुविधाएं होंगी।
ताकि बच्चों को स्कूल आने में रुचि हो
आंगनवाड़ी केंद्रों को इस तरह से विकसित किया जाएगा जहां बच्चे पढ़ने के लिए आने में रुचि दिखाएंगे। ये केंद्र स्कूल की तरह होंगे जहां बच्चों को शुरुआती शिक्षा की सभी जरूरतें पूरी होंगी। इन केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बेहतर माहौल को देखते हुए अच्छा हवादार भवन होगा जिससे बच्चों को पढ़ाई में कोई परेशानी न हो। बच्चे और अभिभावक स्कूल में आयोजित होने वाले कार्यक्त्रस्मों में प्रतिभाग करेंगे।
शिक्षा विभाग को करनी होगी निगरानी
ईसीसीई ट्रेनिंग कार्यक्त्रस्म के तहत स्कूल के शिक्षक और स्थानीय शिक्षा विभाग आंगनवाड़ी केंद्रो पर नजर रखेगा। माह में एक बार क्लास भी लेनी होगी। इसके बाद राज्य सरकार पढ़े-लिखे लोगों को ईसीसीई के लिए तैयार करेगी। ईसीसीई का गठन आदिवासी होगा। ईसीसीई की हर गतिविधि पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय, महिला बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और आदिवासी मामले से जुड़े मंत्रालय रखेंगे।


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