एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 30 Jul 2020 05:25 AM IST
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नई शिक्षा नीति के तहत मेडिकल एवं कानून की पढ़ाई छोड़कर उच्च शिक्षा के लिए उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) का गठन होगा। एचईसीआई के चार स्वतंत्र अंग- राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामकीय परिषद (एनएचईआरसी), मानक निर्धारण के लिए सामान्य शिक्षा परिषद (जीईसी), वित पोषण के लिए उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद (एचईजीसी) और मान्यता के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (एनएसी) होगा।
अब तक यूजीसी, एआईसीटीई, एसीटीई थे। एचईसीआई के नियम सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों मेें लागू होंगे। वैज्ञानिक व सामाजिक अनुसंधानों को नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाकर बढ़ावा दिया जाएगा।
राष्ट्रीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान बनेगा
नई नीति में सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास पर जोर दिया गया है। इसके तहत पाली, फारसी और प्राकृत भाषाओं के लिए भरतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान (आईआईटीआई) की स्थापना होगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में संस्कृत और भाषा विभागों को मजबूत करने की सिफारिश की गई है।
अब तक यूजीसी, एआईसीटीई, एसीटीई थे। एचईसीआई के नियम सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों मेें लागू होंगे। वैज्ञानिक व सामाजिक अनुसंधानों को नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाकर बढ़ावा दिया जाएगा।
राष्ट्रीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान बनेगा
नई नीति में सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास पर जोर दिया गया है। इसके तहत पाली, फारसी और प्राकृत भाषाओं के लिए भरतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान (आईआईटीआई) की स्थापना होगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में संस्कृत और भाषा विभागों को मजबूत करने की सिफारिश की गई है।
ऑनलाइन शिक्षा के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेट तैयार होगा, वर्चुअल लैब और डिजिटल लाइब्रेरी बनेंगी। सभी प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाएं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कराएगी। कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर जोर रहेगा। भारतीय समेत शास्त्रीय भाषाओं में कोर्स उपलब्ध करने पर जोर। संस्कृत की पढ़ाई करवाने पर सरकार आर्थिक रूप से मदद करेगी।
स्कूली शिक्षा के लिए राज्यों में अथॉरिटी
स्कूली शिक्षा के विनियमन, संचालन और अकादमिक मामलों के स्पष्ट प्रणाली बनेगी। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वतंत्र स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथारिटी (एसएसएसए) का गठन होगा।


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