some wrong facts about gandhiji know truth
(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/7गांधीजी के बारे में फैलाई गईं ये अफवाहें, जानें सच

30 जनवरी का दिन भारत के इतिहास का काफी दुखद दिन है। इसी दिन नाथूराम गोडसे ने राष्ट्रपति महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। गांधीजी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। लेकिन देश-दुनिया में एक वर्ग ऐसा भी है जो गांधीजी के बारे में अफवाहें फैलाने में लगा हुआ है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि गांधीजी के बारे में ये बातें कितनी सही हैं तो आइए आज कुछ ऐसी ही बातों को जानते हैं...
2/7नस्लवादी होने का आरोप

1893 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका गए थे। उनकी यात्रा का मकसद वहां रह रहे भारतीयों के अधिकार के लिए लड़ना था। वैसे गांधीजी का शुरुआती कुछ बयान चौंकाने वाला था, जिसको लेकर उन पर नस्लवादी होने का आरोप लगाया गया। लेकिन बाद में उनके अंदर काफी बदलाव आया और अफ्रीकी लोगों के अधिकार का मुद्दा उठाया। अफ्रीकी गांधी कहे जाने वाले नेल्सन मंडेला ने खुद कहा था कि अफ्रीका की आजादी के पीछे उनकी ही प्रेरणा थी।
3/7जातिवादी प्रणाली का समर्थन

धार्मिक आधार पर गांधीजी का मानना था कि लोगो कुछ जाति में पैदा हुए हैं जिसको लेकर लोगों के बीच गलत धारणा बन गई। हकीकत तो यह है कि उन्होंने 1932 में खासतौर पर जातिवादी सिस्टम के खिलाफ भूख हड़ताल की थी। उनका मानना था कि हर किसी को जिंदगी में आगे बढ़ने का अधिकार है और बहुत ही सख्ती से जाति के आधार पर भेदभाव का विरोध किया।
4/7देश विभाजन के लिए जिम्मेदार

गांधीजी देश विभाजन के लिए कितना जिम्मेदार थे, इस बारे में गांधी पीस फाउंडेशन के निदेशक कुमार प्रशांत बताते हैं कि गांधीजी को जब विभाजन की बात के बारे में पता चला तो उन्होंने नेहरू, पटेल और जिन्ना सभी से बातें की और विभाजन रोकने की कोशिश की। जब गांधीजी के सामने विभाजन को रोकने का कोई विकल्प नहीं था तो बंटवारे के बाद भी उन्होंने दोनों देशों के बीच इस बंटवारे को रोकने की कोशिश की। गांधीजी का कहना था कि वह बिना वीजा और पासपोर्ट के पाकिस्तान जाएंगे, जिससे वह भारत पाक विभाजन की वैधानिकता और राजनीतिक सीमा को तोड़ सकें। उनकी सोच थी कि दोनों देश अपनी-अपनी जगह रहें, लेकिन दोनों देशों के लोग बिना किसी रोक-टोक के एक दूसरे के यहां आ-जा सकें।
5/7महिलाओं से अनैतिक संबंध?

गांधी पीस फाउंडेशन के पूर्व निदेशक सुरेंद्र बाबू गांधी कहते हैं, जिन लोगों को ब्रह्मचर्य के प्रयोग के तौर पर गांधी के महिलाओं से संबंध अनैतिक लगते हैं, वे लोग महात्मा गांधी के गहराई से अध्ययन और चिंतन से दूर हैं। महात्मा गांधी ने सत्य के प्रयोग के लिए तमाम टेस्ट किए और उन्हीं में से एक ब्रह्मचर्य के पालन का विषय भी शामिल था। इसी क्रम में महिलाओं के साथ गांधी रहे लेकिन उनके संबंध कभी भी अनैतिक नहीं कहे जा सकते।
6/7हिटलर को दोस्त कहा

लेखक Joseph Lelyveld ने अपनी किताब Great Soul में गांधीजी की चरित्रहनन की कोशिश की है। गांधीजी द्वारा हिटलर को लिखे गए एक पत्र को गलत तरीके से पेश करके उनको हिटलर का दोस्त साबित करने की कोशिश की है। दरअसल गांधीजी ने हिटलर को पत्र लिखा था जिसमें कहा था कि आप दुनिया में शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने हिटलर को Dear Friend कहकर पत्र में संबोधित किया जो औपचारिकता मात्र है। इसी चीज का हवाला देकर Joseph Lelyveld ने बताया कि गांधीजी हिटलर को दोस्त मानते थे।
7/7भगत सिंह की फांसी रुकवाने की कोशिश नहीं की?

गांधीजी ने तो खुद का भी कभी बचाव नहीं किया। हमेशा कहा कि अगर मैंने जुर्म किया है तो मैं उसकी सजा भुगतने के लिए तैयार हूं। चौरी-चोरा कांड की भी पूरी जिम्मेदारी खुद पर लेकर उन्होंने कहा था कि मुझे सजा दे दो। अगर कुछ लोग यह सवाल उठाते हैं कि गांधी ने भगतसिंह को बचाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया तो इसके जवाब में यही कहा जा सकता है कि उन्होंने तो खुद को भी बचाने का कभी प्रयास नहीं किया।

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