increasing work pressure is affecting social life
(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/6काम के दबाव से सोशल लाइफ पर असर?

चीन की टेक कंपनियों के '996' वर्क कल्चर का असर भारतीय कंपनियों पर बढ़ रहा है। यहां काम के दबाव के कारण हर तीन में से एक पेशेवर बच्चों को क्वॉलिटी टाइम नहीं दे पा रहा है। यह बात वर्क प्रेशर से उनकी क्वॉलिटी लाइफ पर पड़नेवाले असर पर गोदरेज के हालिया सर्वे 'मेक स्पेस फॉर लाइफ' से सामने आई है। गोदरेज इंटीरियो के सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर भारतीय मानते हैं कि कामकाज और परिवार के साथ तालमेल बैठाने में उन्हें बहुत दिक्कत हो रही है।
2/6क्या है चाइनीज 996

चीन की बड़ी टेक्नॉलजी कंपनियों और स्टार्टअप्स में लगभग एक दशक से हफ्ते के छह दिन और हर दिन सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक काम का चलन है। यंग टेक आंत्रप्रेन्योर्स के लिए आदर्श माने जाने वाले ग्लोबल ई-कॉमर्स फर्म अलीबाबा के संस्थापक जैक मा ज्यादा वर्किंग आवर्स को 'बड़ा वरदान' मानते हैं। इसकी कॉम्पिटिटर जेडी.कॉम के कर्ताधर्ता रिचर्ड लियू कहते हैं कि दिन बर्बाद करनेवाले मेरे भाई नहीं हो सकते हैं।
3/6996.ICU का क्या है मतलब

दुनियाभर के प्रोग्रामर्स कोड और सॉफ्टवेयर टूल्स शेयरिंग प्लैटफॉर्म के तौर पर मशहूर गिटहब ने काम के लंबे घंटों के कारण कई चाइनीज कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया है। इनमें अलीबाबा, जेडी.कॉम और शॉर्ट विडियो प्लैटफॉर्म टिकटॉक चलानेवाली सोशल मीडिया फर्म बाइटडांस भी है। गिटहब पर 996 के खिलाफ डिबेट इस साल मार्च में 996icu स्क्रीननेम वाले एक यूजर की पोस्ट के साथ शुरू हुई थी। 996icu का मतलब यह कि 9 से 9 और 6 दिन वाला काम इंजिनियर्स को ICU में पहुंचा देता है।
4/6भारत में क्या है स्थिति

गोदरेज इंटेरियो के COO अनिल माथुर के मुताबिक, लोगों की यह सोच एकदम गलत साबित हो रही है कि टेक्नॉलजी उनकी जिंदगी आसान बना सकती है। उनका कहना है कि उल्टे यह काम के बढ़ते दबाव के चलते लोगों को परिवार और बच्चों से दूर कर रही है। गोदरेज की स्टडी में शामिल 64% लोगों का मानना है कि वे परिवार को समय नहीं दे पा रहे हैं जबकि 28% को खुद से शिकायत है कि वे जीवनसाथी के साथ क्वॉलिटी टाइम नहीं गुजार पा रहे हैं। गोदरेज के सर्वे में भाग लेनेवाले 21.2% प्रफेशनल्स का कहना है कि वे दोस्तों को समय नहीं दे पाते हैं। 61% को सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात की है कि कामकाज की आपाधापी में उन्हें अपने शौक के लिए वक्त नहीं मिल रहा है। इतने ही लोगों का मानना है कि पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शौक को जेहन में जड़ जमाने नहीं दे रही हैं।
5/6जर्मनी का फंडा

वॉलस्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में वर्क वीक को 40 घंटे से घटाकर 25 घंटे करने वाली एक जर्मन टेक कंसल्टिंग फर्म का जिक्र किया है। 16 लोगों की स्टार्टअप राइनगंस डिजिटल इनेबलर ने दफ्तर में सोशल मीडिया का यूज बैन किया है, उसके कर्मचारी दिन में दो बार मेल चेक कर सकते हैं, सबका स्मार्टफोन उनके बैग में पड़ा रहता है। नतीजा? स्टाफर्स की हफ्तेभर की प्रॉडक्टिविटी जस की तस बनी हुई है और उन्हें परिवार के साथ बिताने के लिए ज्यादा समय मिल रहा है।
6/6फेसबुक चेक करने का फायदा नहीं

वेबसाइट्स, ऐप्स और ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स डिवेलप करनेवाली इस फर्म के एमडी लासा राइनगंस का फंडा है कि अगर लोग ऑफिस में काम की थकान के बाद रिचार्ज होने के लिए थोड़ा वक्त पाने के लिए ऑनलाइन पेपर पढ़ते हैं या फेसबुक चेक करते हैं तो इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होता है। वह मानते हैं कि ऑफिस आने के बाद स्टाफ पहले पांच घंटे काम में पूरा ध्यान लगाए और प्रॉपर ब्रेक लेते हुए दिन का बाकी हिस्सा अपने हिसाब से बिताए।

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