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(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/6सीवी रमन से जुड़ी ये बातें जानते हैं आप

भारत के महान वैज्ञानिक और भौतिकशास्त्री सर चंद्रशेखर वेंकटरमन (सीवी रमन) की आज यानी 7 नवंबर को जयंती है। उनका जन्म सन 1888 में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। सीवी रमन पहले भारतीय थे जिन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस खास मौके पर हम आपको महान वैज्ञानिक से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं जो शायद आपको न मालूम हों...
2/6कहां से हुई शिक्षा

सीवी रमन के पिता गणित और भौतिकी के प्रफेसर थे। रमन ने तत्कालीन मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से बीए किया और 1905 में वहां से गणित में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले वह अकेले छात्र थे। इसी कॉलेज में उन्होंने एमए में ऐडमिशन लिया और मुख्य विषय भौतिकी को चुना।
3/6प्रकीर्णन के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान

रमन ने प्रकाश प्रकीर्णन के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया। इसके तहत जब प्रकाश किसी पारदर्शी मटीरियल से गुजरता है तो उस दौरान प्रकाश की तरंगदैर्ध्य में बदलाव दिखता है। इसी को रमन प्रभाव कहा जाता है।
4/6नोबेल पुरस्कार से सम्मानित

प्रकाश के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए सर सीवी रमन को वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। रमन प्रभाव के लिए ही 1954 में उनको सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया।
5/6जब रमन ने किया सरकारी नौकरी का रुख

एक वक्त था जब विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की सुविधा न मिलने के कारण रमन ने सरकारी नौकरी का रुख किया। दरअसल, रमन तो विज्ञान के क्षेत्र में काम करना चाहते थे लेकिन उनके भाई चाहते थे कि वह सिविल सर्विस का एग्जाम पास कर बड़े अधिकारी बनें। रमन का परिवार कर्ज में डूबा था और उन पर परिवार का कर्ज उतारने की जिम्मेदारी थी। चूंकि विज्ञान के क्षेत्र में सीमित अवसर थे, ऐसे में परिवार की माली हालत देखकर वह इसमें अपना करियर नहीं बना पा रहे थे। अपने भाई के कहने पर रमन ने भारत सरकार के वित्त विभाग की प्रतियोगिता परीक्षा में भाग लिया और वह प्रथम आए। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता (अब कोलकाता) में 1907 में असिस्टेंट अकाउटेंट जनरल की नौकरी की। हालांकि, विज्ञान के प्रति उनका लगाव बना रहा और यहां वह इंडियन असोसिएशन फॉर कल्टीवेशन ऑफ साइंस और कलकत्ता यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं में रिसर्च करते रहे।
6/6नौकरी से दिया इस्तीफा

रमन ने 1917 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह कलकत्ता यूनिवर्सिटी में प्रफेसर हो गए। यहीं पर 28 फरवरी 1928 को उन्होंने केएस कृष्णन समेत अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिलकर रमन प्रभाव की खोज की।

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