nobel prize 2019 why there is no nobel in mathematics
(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)
1/9आखिर मैथ्स में क्यों नहीं नोबेल, लव और धोखा से संबंध?

आपने फिजिक्स, केमिस्ट्री, अर्थशास्त्र और शांति का नोबेल पुरस्कार सुना होगा। लेकिन क्या आपने सुना है कि किसी को मैथमेटिक्स का नोबेल पुरस्कार मिला है? आखिर ऐसा क्यों है? आइए आज जानते हैं इससे संबंधित कुछ थिअरी...
2/9सामान्य तौर पर स्वीकार थिअरी

आमतौर पर यह माना जाता है कि अल्फ्रेड नोबेल ने उन विषयों में पुरस्कार देने का फैसला किया जिसमें उनकी दिलचस्पी थी। वह फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन और लिटरेचर में दिलचस्पी रखते थे। कहा जाता है कि उनकी गणित में कोई दिलचस्पी नहीं थी।फोटो: साभार GettyImages
3/9शांति का नोबेल

जहां तक शांति के नोबेल की बात है तो माना जाता है कि उनकी प्रेमिका और सेक्रेटरी बर्था किंस्की ने इसका सुझाव दिया था जिसे 1905 में पुरस्कार मिला था। शांति के नोबेल को लेकर एक थिअरी यह भी है कि डायनामाइट और अन्य विस्फोटकों जैसी चीजों की खोज के कारण अल्फ्रेड को 'मौत का सौदागर' कहा जाता था। ऐसे में इस पुरस्कार को उनके दामन पर लगे बदनामी के धब्बे को धुलने के प्रयास के तौर पर देखा गया।फोटो: साभार GettyImages
4/9गणित के लिए पहले से था पुरस्कार

एक थिअरी यह है कि स्वीडन और नॉर्वे के राजा ऑस्कर-II ने यूरोप के गणितज्ञों के लिए एक पुरस्कार शुरू किया था। उनको यह पुरस्कार देने के लिए उस समय के महान गणितज्ञ गोस्टा मिटाग लेफलर ने राजी किया था। ऐसे में अल्फ्रेड ने सोचा होगा कि जब पहले से गणित का एक पुरस्कार दिया जा रहा है और उनकी गणित में दिलचस्पी भी नहीं थी तो किसी ऐसे क्षेत्र में पुरस्कार दिया जाए जिसमें उनकी दिलचस्पी दी थी।फोटो: साभार विकिमीडिया कॉमंस
5/9लव और धोखा

एक अफवाह यह है कि अल्फ्रेड नोबेल की एक गर्लफ्रेंड थी। उससे अल्फ्रेड काफी प्यार करता था। लेकिन बाद में उस गर्लफ्रेंड ने अल्फ्रेड को धोखा दिया और उस समय के बड़े गणितज्ञों में शुमार मिटाग से संबंध बना लिए। इस थिअरी के मुताबिक, अगर गणित का नोबेल शुरू किया जाता तो ऐसे में उस समय उस पुरस्कार का सबसे बड़ा दावेदार मिटाग होता जिससे अल्फ्रेड की निजी रंजिश थी। इसलिए अल्फ्रेड ने गणित का नोबेल नहीं देने में भलाई समझी।फोटो: साभार GettyImages
6/9मैथ्स का 'नोबेल'

मैथ्स की फील्ड में फील्ड्स मेडल दिया जाता है। इसको मैथ्स का 'नोबेल' भी कहा जाता है। ऑफिशली तौर पर इसको International Medal for Outstanding Discoveries in Mathematics कहा जाता है। यह हर चार साल पर इंटरनैशनल कांग्रेस ऑफ मैथमेटिशंस में 40 साल से कम उम्र के चार गणितज्ञों को दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1936 में कनाडा के गणितज्ञ जॉन चार्ल्स के प्रोत्साहन पर हुई। इसके तहत 15,000 डॉलर के करीब नकद पुरस्कार यानी 10 लाख रुपये के करीब दिया जाता है।
7/9एबल पुरस्कार

इसे भी नोबेल पुरस्कार के बराबर माना जाता है। एबल पुरस्कार की शुरुआत नॉर्वे के चर्चित गणितज्ञ नील्स हेनरिक एबल के नाम पर हुई। हर साल नॉर्वे का राजा यह पुरस्कार देता है। विजेताओं के चयन के लिए पांच अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञों के एक पैनल का गठन किया जाता है। इसमें 1 मिलियन डॉलर के करीब यानी 7 करोड़ रुपये के करीब दिया जाता है।
8/9कैसे शुरू हुआ एबल पुरस्कार

एबल पुरस्कार की घोषणा भी उसी समय के आसपास हुई जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई थी। उस समय नॉर्वे के प्रसिद्ध गणितज्ञ सोफिस ली ने तब इसका प्रस्ताव रखा था जब उनको पता चला कि अल्फ्रेड ने मैथ्स में नोबेल नहीं देने का फैसला किया है। लेकिन इस पुरस्कार के लिए नॉर्वे के राजा ने 1905 में नॉर्वे और स्वीडन के विभाजन के बाद दिलचस्पी जाहिर की। इस पुरस्कार की शुरुआत 2002 में एबल की 200वीं जयंती पर हुई।फोटो: साभार Twitter
9/9चर्न मेडल

इस पुरस्कार की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। यह पुरस्कार भी हर चार साल पर इंटरनैशनल कांग्रेस ऑफ मैथमेटिशंस में दिया जाता है। इसके तहत 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 2 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है। (फोटो: साभार GettyImages)

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