देश में जल संकट को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अच्छी और बड़ी पहल की है। बोर्ड ने सभी स्कूलों में पानी के बेहतर प्रबंधन को अब अनिवार्य बना दिया है। सीबीएसई ने अगले तीन वर्षों में स्कूलों को जल प्रबंधन की नीति अपनाने और नियमित तौर पर पानी बचाने के उपायों की जांच कराने का निर्देश दिया है।
बोर्ड ने छात्रों, शिक्षकों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रमों में पानी से संबंधित पाठों को बढ़ाए जाने का भी सुझाव दिया है। जल साक्षरता बढ़ाने के लिए समय-समय पर शैक्षिक कार्यशालाएं आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है।
सीबीएसई से जुडे़ स्कूलों में जल संरक्षण को लेकर एक दिशानिर्देश जारी किया गया है। इसमें स्कूलों से कहा गया है कि वे अपने यहां के पुराने उपकरणों और मशीनों में बदलाव लाएं, ताकि पानी की बचत ज्यादा से ज्यादा की जा सके। इसमें कहा गया है कि स्वचालित और सेंसर युक्त टैप और दोहरे फ्लश वाले टैंक लगाएं जाएं।
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यह भी नियमित तौर पर सुनिश्चित किया जाए कि जो भी उपकरण लगाएं जाएं, उनमें लीकेज की समस्या न हो और न ही किसी प्रकार की टूट-फूट। कहा गया है कि जल संरक्षण में स्कूलों को दक्ष बनाने का मकसद यह है कि इससे न सिर्फ स्कूल के बुनियादी ढांचे में बदलाव आएगा, बल्कि स्कूल चलाने वाले और उसमें पढ़ने वालों में जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी।
सीबीएसई के एक अधिकारी के मुताबिक, हर दिन स्कूलों में पानी का बेतहाशा इस्तेमाल किया जाता है। इनमें पीने के लिए, वॉशरूम, कैंटीन, लेबोरेटरी, मैदान, लॉन और गार्डन शामिल है। जल संरक्षण की मदद से स्कूलों की प्रदूषण से निपटने के प्रति जवाबदेही बढ़ाई जाएगी।
21 शहरों में 2020 तक भूजल में भारी कमी
सीबीएसई ने यह कदम उस वक्त उठाया है, जब हाल ही में नीति आयोग की एक रिपोर्ट में दिल्ली, बंगलूरू, चेन्नई और हैदराबाद समेत देश के 21 शहरों में 2020 तक भूजल के स्तर में भारी गिरावट आने को लेकर चिंता जताई गई थी। इसमें कहा गया था कि इससे देश के करीब 10 करोड़ लोग पानी की कमी से प्रभावित होंगे।
स्कूलों को बनानी होगी समिति
जल का बेहतर इस्तेमाल करने वाले स्कूलों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे स्कूल जल प्रबंधन समिति का गठन करें। उसमें स्कूल प्रशासन, शिक्षक, छात्र, गैर शिक्षक स्टाफ, अभिभावक और समुदायों के कुछ लोगों को शामिल करें। यह समिति स्कूलों में पानी के बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने, उसकी समय-समय पर समीक्षा करने और पानी की बर्बादी की निगरानी कर उस पर रोक लगाने और जल संरक्षण के उपायों अपनाना सुनिश्चित करेगी।
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वॉटर ऑडिट करानी होगी
अधिकारी ने बताया कि स्कूलों को नियमित तौर पर नए मानदंडों के मुताबिक वाटर ऑडिट करानी होगी, ताकि वे अपने यहां जल संरक्षण के उपायों का सख्ती से पालन कर सकें। इसमें स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्कूल में मौजूद हरे-भरे क्षेत्रों में सिंचाई के तौर-तरीकों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, स्कूलों में पानी के दोबारा इस्तेमाल करने के उपकरणों, देसी और सूखारोधी पौधों को लगाए जाने पर जोर दिया जाएगा।
खास बातें
- स्कूलों में पानी बचाने की कवायद, इसकी पढ़ाई से लेकर वॉटर ऑडिट तक शामिल
- 2020 तक भूजल संकट की नीति आयोग की रिपोर्ट के बाद सीबीएसई ने जारी किए निर्देश
देश में जल संकट को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अच्छी और बड़ी पहल की है। बोर्ड ने सभी स्कूलों में पानी के बेहतर प्रबंधन को अब अनिवार्य बना दिया है। सीबीएसई ने अगले तीन वर्षों में स्कूलों को जल प्रबंधन की नीति अपनाने और नियमित तौर पर पानी बचाने के उपायों की जांच कराने का निर्देश दिया है।
बोर्ड ने छात्रों, शिक्षकों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रमों में पानी से संबंधित पाठों को बढ़ाए जाने का भी सुझाव दिया है। जल साक्षरता बढ़ाने के लिए समय-समय पर शैक्षिक कार्यशालाएं आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है।
सीबीएसई से जुडे़ स्कूलों में जल संरक्षण को लेकर एक दिशानिर्देश जारी किया गया है। इसमें स्कूलों से कहा गया है कि वे अपने यहां के पुराने उपकरणों और मशीनों में बदलाव लाएं, ताकि पानी की बचत ज्यादा से ज्यादा की जा सके। इसमें कहा गया है कि स्वचालित और सेंसर युक्त टैप और दोहरे फ्लश वाले टैंक लगाएं जाएं।
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यह भी नियमित तौर पर सुनिश्चित किया जाए कि जो भी उपकरण लगाएं जाएं, उनमें लीकेज की समस्या न हो और न ही किसी प्रकार की टूट-फूट। कहा गया है कि जल संरक्षण में स्कूलों को दक्ष बनाने का मकसद यह है कि इससे न सिर्फ स्कूल के बुनियादी ढांचे में बदलाव आएगा, बल्कि स्कूल चलाने वाले और उसमें पढ़ने वालों में जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी।
सीबीएसई के एक अधिकारी के मुताबिक, हर दिन स्कूलों में पानी का बेतहाशा इस्तेमाल किया जाता है। इनमें पीने के लिए, वॉशरूम, कैंटीन, लेबोरेटरी, मैदान, लॉन और गार्डन शामिल है। जल संरक्षण की मदद से स्कूलों की प्रदूषण से निपटने के प्रति जवाबदेही बढ़ाई जाएगी।
21 शहरों में 2020 तक भूजल में भारी कमी
सीबीएसई ने यह कदम उस वक्त उठाया है, जब हाल ही में नीति आयोग की एक रिपोर्ट में दिल्ली, बंगलूरू, चेन्नई और हैदराबाद समेत देश के 21 शहरों में 2020 तक भूजल के स्तर में भारी गिरावट आने को लेकर चिंता जताई गई थी। इसमें कहा गया था कि इससे देश के करीब 10 करोड़ लोग पानी की कमी से प्रभावित होंगे।
स्कूलों को बनानी होगी समिति
जल का बेहतर इस्तेमाल करने वाले स्कूलों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे स्कूल जल प्रबंधन समिति का गठन करें। उसमें स्कूल प्रशासन, शिक्षक, छात्र, गैर शिक्षक स्टाफ, अभिभावक और समुदायों के कुछ लोगों को शामिल करें। यह समिति स्कूलों में पानी के बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने, उसकी समय-समय पर समीक्षा करने और पानी की बर्बादी की निगरानी कर उस पर रोक लगाने और जल संरक्षण के उपायों अपनाना सुनिश्चित करेगी।
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वॉटर ऑडिट करानी होगी
अधिकारी ने बताया कि स्कूलों को नियमित तौर पर नए मानदंडों के मुताबिक वाटर ऑडिट करानी होगी, ताकि वे अपने यहां जल संरक्षण के उपायों का सख्ती से पालन कर सकें। इसमें स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्कूल में मौजूद हरे-भरे क्षेत्रों में सिंचाई के तौर-तरीकों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, स्कूलों में पानी के दोबारा इस्तेमाल करने के उपकरणों, देसी और सूखारोधी पौधों को लगाए जाने पर जोर दिया जाएगा।
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